राकेश,ऊना: आज के दौर में मिलावटी ओर केमिकल युक्त खाद्य पदार्थों ओर सब्जियों का प्रयोग ना कर लोग ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल कर रहे हैं। बाजारों में कई मर्तबा ऑर्गेनिक सब्जियां लोगों को उपलब्ध नहीं हो पाती हैं जहां मिलती हैं तो इनके दाम ही बहुत ज्यादा होते हैं। ऐसे में इस समस्या का तोड़ ऊना की रहने वाली मीना कुमारी ने ढूंढ निकाला हैं। मीना कुमारी ने अपने घर की छत पर ही ऑर्गेनिक सब्जियां उगा डाली हैं। उनकी छत का कोई भी कोना ऐसा नहीं है जहां पर उन्होंने सब्जियां या फूल लगाने के लिए उसका इस्तेमाल ना किया हो।
यही वजह है कि आज वह अपने घर की छत पर ही इतनी ऑर्गेनिक सब्जियों को उगा रही हैं कि उन्हें अब बाजार से सब्जियां खरीद कर लाने की जरूरत ही महसूस नहीं होती है और खाने के लिए घर की छत पर ही ऑर्गेनिक सब्जियां तैयार हो रही हैं। मीना ने कीटनाशक सब्जियों को छोड़कर टेरेस फार्मिंग से ही ऑर्गेनिक सब्जियों उगाई हैं। वहीं सब्जियों के साथ-साथ उन्होंने अनेक प्रकार के फ्रूट और अन्य खुशबूदार फूल भी उगाकर टेरेस फार्मिंग को बढ़ावा दिया है जिसके अच्छे परिणाम सामने लाए हैं।
मीना ऊना जिला के भटौली गांव की रहने वाली हैं और उन्होंने अपने घर की छत पर ही टेरेस फार्मिंग के जरिए ड्रैगन फ्रूट, लांग, छोटी इलायची,पपीता ,आम ,अनार, अमरूद,लीची, केला सहित कुछ ऐसी सब्जियां जो मार्किट में भी देखने को नहीं मिलती हैं उन्हें उगा डाला हैं।
उन्होंने बल्ला की सब्जी को उगाया हैं। वहीं सब्जियों के साथ-साथ उन्होंने काटेदार कैक्टस की वैरायटी के साथ अनेक प्रकार की सब्जियां,फलो व फूलों के पौधों को उगा कर एक अच्छी पहल की हैं। मीना ने बताया कि वह शुरू से ही ऑर्गेनिक सब्जियां खाना पसंद करती थी। मार्केट में मिलने वाली सब्जियां कीटनाशक है और इनका मानव शरीर पर बहुत ज्यादा बुरा असर पड़ता हैं। कीटनाशक सब्जियां खाने से बच्चों के मानसिक संतुलन और जीवन ग्रोथ पर भी बड़ा असर देखने को मिलता हैं और इंसान को कई प्रकार की बीमारियों का भी सामना करना पड़ता हैं। यही वजह हैं कि उन्होंने ऑर्गेनिक फार्मिंग को चुना और इसके लिए उन्होंने अपनें घर की छत को सबसे बेहतर स्थान माना हैं।
मीना की माने तो इसके लिए वह देसी खाद का इस्तेमाल करती है और उसी के जरिए सब्जियां और फ्रूट की पैदावार करती हैं। ऑर्गेनिक तरीके से उगाई गई सब्जियां व फ्रूट का स्वाद सबसे बेहतर और मीठा होता है और इसका मानव शरीर पर कोई बुरा असर भी नहीं पड़ता। उन्होंने बताया कि इसके लिए कोई ज्यादा समय भी नहीं निकालना पड़ता और घर में रहते ही टेरेस फार्मिंग के जरिए घर की पैदा हुई सब्जियां इस्तेमाल कर सकते हैं। बाजार से कोई भी सब्जी व कोई भी फ्रूट वह नहीं लेकर आती इससे उनका बजट भी नहीं बिगड़ता और उन्हें स्वादिष्ट सब्जियां और फ्रूट भी अपने घर की छत पर ही मिलता हैं।
मीना की माने तो महिलाएं उनके पास बकायदा उनकी टेरेस फार्मिंग को देखने भी आती है और उनसे टेरेस फार्मिंग के गुर भी सीखती हैं। मीना महिलाओं को ऑर्गेनिक फार्मिंग से जुड़ने का संदेश दे रही है और अपने घर पर ही टेरेस फार्मिंग कर ऑर्गेनिक सब्जियां उगा कर अपनी आर्थिकी को भी मजबूत कर रही हैं। वहीं उन्होंने अपने घर की छत पर एक विशेष प्रकार के तैयार किए गए बैग का इस्तमाल किया है ताकि घर की छत पर ज्यादा भार न पड़े और पौधे भी ज्यादा खिले।
