सीमा शर्मा, मंडी: मिड डे मील,आगंनबाड़ी और आशा वर्करों का न्यूनतम वेतन 26 हजार निर्धारित करने और स्कीम वर्करों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर शुक्रवार को मंडी में धरना प्रर्दशन हुआ। यह धरना प्रदर्शन मंडी के सेरी चाननी में सीटू के बैनर तले इन वर्करों ने केंद्र सरकार के खिलाफ़ किया। प्रदर्शन में जमकर नारेबाजी केंद्र के खिलाफ़ की गई। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार और सांसदों को मांगपत्र प्रेषित किए गए। इस दौरान सांसदों से संसद में इनके हक में आवाज उठाने और मांगों को पुरा करने की मांग की गई।
मिड डे मील वर्करज यूनियन ने सीटू के बैनर तले सेरी चाननी पर धरना प्रर्दशन किया। उसके बाद सांसद प्रतिभा सिंह को मांगपत्र भी सौंपा गया। धरना प्रर्दशन के दौरान वर्करों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। सीटू जिला मंडी केअध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने बताया कि मिड डे मील वर्करज का न्यूनतम वेतन 26 हजार निर्धारित करने और स्कीम वर्करों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन किया गया हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मिड डे मिल, आगंनबाड़ी और आशा वर्कर की ये तीन योजना स्कीम के रूप में शुरू की। जबसे इन्हें लगाया गया हैं तबसे मजदूरों की श्रेणी में नहीं आते हैं आज भी इन्हे स्वयंसेवी गिना जाता है।
उन्होंने 45 वें श्रम सम्मेलन की सिफ़ारिशों को लागू करने की भी मांग की हैं, जिसमें इन सभी स्कीम वर्करों को मज़दूर घोषित करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन उसे केंद्र सरकार ने अभी तक लागू नहीं किया हैं। इसके कारण इन लाखों महिला स्कीम वर्करों को न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल रहा हैं। उन्होंने कहा कि सांसद किसी भी दल का हो उनसे मांग है कि बजट सत्र होना हैं,उसमें स्कीम वर्करों की मांगों को पूरा करने का समर्थन करें। अगर ऐसा नहीं होता है तो 5 अप्रैल को संसद मार्च किया जाएगा जिसमें देश के लाखों मजदूर भाग लेंगे।
