मंडी,धर्मवीर(TSN)-शहनाई वादन में हिमाचल के बिस्मिल्लाह खां कहे जाने वाले मंडी निवासी मशहूर शहनाई वादक सूरजमणी के बीती देर रात गंभीर बीमारी के चलते निधन हो गया। उन्होंने बिलासपुर के एम्स में अंतिम सांस ली जिसके साथ ही सूरजमणी की शहनाई हमेशा के लिए खामोश हो गई। शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार गोहर उपमंडल के चच्योट में पूरे रीति रिवाज के साथ छमयार शमशान घाट पर किया गया। अचानक से हुई इस घटना से मंडी के साथ पूरे हिमाचल प्रदेश के कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। विभिन्न माध्यमों से अपने शोक संदेश सभी ने भेजे हैं।
राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर शहनाई वादन की कला की छोड़ी छाप
राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपनी शहनाई वादन की कला की छाप छोड़ने वाले मंडी जिला के गोहर उपमंडल के चच्योट निवासी सूरजमणी चार दिनों से जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे। जानकारी के अनुसार 62 वर्षिय सूरजमणी बीते मंगलवार को चंडीगढ़ से किसी कार्यक्रम में हिस्सा लेकर मंडी बस स्टैंड पहुंचे जहां पर उनकी तबियत बिगड़ गई और उन्हें लोगों ने निजी हार्ट अस्पताल में भर्ती करवाया जहां उन्हें वेंटिलेंटर पर रखा गया। उसके बाद उन्हें बिलासपुर के एम्स में भर्ती करवाया गया जहां पर वीरवार देर रात को उन्होंने अंतिम सांस ली। शुक्रवार को उनके गांव चच्योट में उनके दो बेटों भूप सिंह व वीरी सिंह ने अपने पिता को नम आंखों से मुखाग्नी दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार सूरजमणी पेन्क्रियाटाइटिस बीमारी से ग्रसित थे। दिवंगत शहनाई वादक सूरजमणी के बेटे वीरी सिंह ने बताया कि आने वाले समय में उनकी इस कला को उनके पोतों के माध्यम से जीवंत रखने का प्रयास किया जाएगा।
