बीबीएन : जगत सिंह -हंडूर रियासतकाल से आयोजित हो रहे मंगला दे मेले के अवसर पर भारी संख्या में लोगों ने शीतला माता के दर पर शीश नवाया और परिवार की तदंरूस्ती व चर्म रोगों से उपचार के लिए प्रार्थना की। इस मेले में बीबीएन सहित पड़ोसी राज्यों तक के लोग यहां शीश नवाने आते है ।
मेले के अवसर पर शहरवासियों ने जगह जगह मीठे पानी की छबीलें व भंडारों का आयोजन किया , । प्राचीन समय से ही तीसरे व चौथे मेले में बाकि मंगलवारों की अपेक्षा खासी भीड़ उमड़ती है।मंगला दे मेले पर श्रद्धालु मंदिर में पवित्र जल, गुलगुले, चने, खील—बताशा व अनाज का प्रसाद चढ़ाते है और अनाज का दान चढ़ाते है। इस मेले में बीबीएन क्षेत्र के अलावा पंजाब, हरियाणा आदि दूरदराज क्षेत्रों के हजारों की संख्या में लोग यहां शीश नवाने आते है और माता का आर्शीवाद प्राप्त करते है। इन मेलों के दौरान लोगो ने मां के दरबार में बच्चों व बड़ों को होने वाली फोड़ा, फूंसी, चिकनपॉक्स आदि रोगों से निजात पाने के लिए दरबार में शीश नवाया ।
आधुनिक समय में छोटा पड़ गया है मेला स्थल
यह मेला हंडूर रियासत के शासनकाल से मनाया जाता आ रहा है, लेकिन अब मेले का स्थल सिकुड़ गया है। नालागढ़-रामशहर मार्ग पर शीतला माता मंदिर के पास चारों ओर मकान, दुकानें, स्कूल, बैंक, गेस्ट हाऊस, भवन आदि स्थापित है ।जिसके चलते मेले के लिए जगह कम पड़ गई है। ऐतिहासिक मंगला दे मेले का चलन करीब पांच सौ सालों से चला आ रहा है, लेकिन औद्योगिकरण और आधुनिकता के चलते मेला स्थल सिकुड़ गया है और मेला स्थल पर अब लोगों ने नई कंस्ट्रक्शन कर दी है, जिससे मेला स्थल कम हो गया है।
