शिमला,24अगस्त-सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, हिमाचल प्रदेश पुलिस महानिदेशक डॉ. अतुल वर्मा,आईपीएस के निर्देशन में यातायात, पर्यटक और रेलवे (टीटीआर) विभाग,शिमला द्वारा आईएसबीटी शिमला में भारी और हल्के वाणिज्यिक वाहनों के चालकों के लिए एक दिवसीय नेत्र शिविर का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य परिवहन चालकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करना था, जिसमें दीन दयाल उपाध्याय जिला अस्पताल, शिमला की विशेष चिकित्सा टीम ने सहयोग दिया।इस टीम में नेत्र चिकित्सा अधिकारी,ऑप्टोमेट्रिस्ट और तकनीशियन शामिल थे।
बता दें कि इस शिविर में 105 चालकों के नेत्र जांच किए गए,जिनमें से 7 लोगों को उपचार के लिए नेत्र अस्पताल जाने की सलाह दी गई। यह सुनिश्चित किया गया कि किसी भी संभावित नेत्र समस्याओं का समाधान समय पर हो, जिससे सड़क सुरक्षा प्रभावित न हो।विशेष रूप से, प्रतिभागियों में से किसी में भी रंग अंधापन या अन्य नेत्र संबंधी अयोग्यता का मामला नहीं पाया गया। इसके अलावा, 91 व्यक्तियों की एचआईवी, एचसीवी, सिफलिस और एचबीएसएजी के लिए जांच की गई, जिनमें सभी के परिणाम नकारात्मक पाए गए। इस शिविर के पुलिस समन्वयक, अतिरिक्त एसपी नरवीर सिंह राठौर ने इस प्रकार की पहलों के महत्व पर बल दिया, जो ड्राइवरों के स्वास्थ्य को बनाए रखने और सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में सहायक हैं। इस कार्यक्रम को स्थानीय ट्रक, टेम्पो और टैक्सी यूनियनों से भी सराहना मिली, जिन्होंने ड्राइवरों की भलाई के प्रति पुलिस के प्रयासों की प्रशंसा की।
डीआईजी टीटीआर गुरदेव चंद शर्मा, आईपीएस, जिन्होंने इस शिविर का दौरा किया, ने राज्य की सड़क सुरक्षा पहल के तहत इन नेत्र जांच शिविरों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नियमित नेत्र जांच न केवल इष्टतम दृष्टि बनाए रखने के लिए आवश्यक है,बल्कि यह सुरक्षित ड्राइविंग के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस तरह के शिविर आंखों की समस्याओं की समय पर पहचान, रंग अंधापन से संबंधित दुर्घ*टनाओं की रोकथाम और समग्र स्वास्थ्य निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।इसके अलावा, यह पहल ड्राइवरों के बीच नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाती है और सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करती है।हिमाचल प्रदेश पुलिस सुरक्षित सड़कों और स्वस्थ ड्राइवरों को सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय उपायों को लागू करने के लिए समर्पित है,जिससे सड़क दुर्घ*टनाओं और मौ*तों के जोखिम को कम किया जा सके।
