संजीव महाजन,नूरपुर: हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के चलते जानमाल का काफ़ी ज्यादा नुकसान हो चुका हैं। 10 हजार करोड़ के करीब नुकसान का आकंलन अभी तक लगाया जा रहा हैं। इस आपदा में सैकड़ों लोगों ने अपनी जान गवांई हैं तो वहीं सैकड़ो लोग बेघर हो गए हैं। ऐसे में प्रदेश सरकार की ओर से इस आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग केंद्र से की जा रही हैं। वही कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता सुदर्शन शर्मा ने भी हिमाचल की त्रासदी को गंभीरता से लेने की बात केंद्र सरकार से कही हैं।
उनका कहना हैं कि हिमाचल प्रदेश की मौजूदा कांग्रेस सरकार प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुखु के नेतृत्व में दिन रात प्रभावितों को राहत शिविरों के माध्यम से राहत प्रदान कर राजधर्म निभा रही हैं। हिमाचल प्रदेश में यह पच्चास वर्ष में भयंकर त्रासदी हैं, जिसमें करीब दस हजार करोड़ का नुकसान हुआ हैं। इसकी भरपाई के लिए केंद्र सरकार आगे आए।
प्रदेश प्रवक्ता ने बीजेपी के हिमाचल के सांसदों से यह प्रश्न किया कि जिन लोगों की कृपा से आप संसद में पहुंचे उनके प्रति इस त्रासदी में आपके क्या प्रयास रहे है ? प्रदेश के पूर्व में रहे मुख्यमंत्री व विधानसभा में विपक्ष के नेता ठाकुर जयराम की ओर से प्रदेश के लोगों को धनराशि के आंकड़ों के जाल में उलझाने का प्रयास किया जा रहा हैं। उन्होंने कहा कि मात्र घोषणा करना ही दायित्व नहीं होता, बल्कि धरातल पर भी अमल होना चाहिए।
उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से आग्रह किया कि इस विपदा की घड़ी में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हिमाचल सरकार का सहयोग करे। उन्होंने पूर्व में रहे मुख्यमंत्री शांता कुमार के व्यक्तव्य की तारीफ की जिन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की आपदा में आपदा के समय में बेहतरीन कार्य करने के लिए तारीफ की हैं।
प्रदेश प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री की ओर से हिमाचल त्रासदी को केंद्र सरकार राष्ट्रीय आपदा की घोषणा के निवेदन का समर्थन किया है, ताकि हिमाचल प्रदेश में आम जनमानस के नुकसान की भरपाई हो सके। प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि बीजेपी के प्रदेश नेताओं की ओर से इस दुख की घड़ी में भी हिमाचल सरकार की नीतियों के प्रति टिप्पणी करना मात्र राजनीतिक रोटियां सेंकना हैं। कांगड़ा- चंबा सांसद की ओर से यह कहना कि केंद्र सरकार के फंड ओर कोरोना काल के दौरान इंजेक्शन उपलब्ध करवाना भी उपलब्धि है बहुत ही शर्मनाक व्यक्तव्य हैं जिसकी वह निंदा करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया की क्या यह केंद्र सरकार का दायत्व नही था।
