बिलासपुर (सुभाष ठाकुर): बिलासपुर के स्वारघाट के अंतर्गत अजीत सिंह ने अपनी पूरी जिंदगी एक झुग्गी में गुजार दी। हिमाचल के लोग होने के बावजूद उसके पास ना तो मकान बनाने के लिए जगह है और ना तो पैसा। इसके अलावा बिना बिजली के अंधेरे में लगभग 40 साल गुजार दिए। यहां पर डिजिटल इंडिया की बात होती है लेकिन इन जेसे लोगो के लिए मूलभूत सुविधाएं भी सरकार उपलब्ध नहीं करवा पाई।
केंद्र सरकार व हिमाचल प्रदेश सरकार ने कई योजनाएं गरीबों के आवास को लेकर शुरू की है, लेकिन ना जाने क्यों जिन लोगों को इन योजनाओं की निहायत जरूरत है उन लोगों को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे कई मामले सामने आते हैं जब सरकारी योजनाओं का लाभ जिन लोगों को ज्यादा जरूरत होती है उन्हें नहीं मिल पाता और मिलता उन्हीं को है जो नेताओं के चहेते हैं। जी हां अजीत सिंह की जिंदगी की दास्तान भी कुछ इसी प्रकार की है। कुछ दिन पहले जब तेज बरसात हुई तो अचानक कच्चा मकान गिर गया।
गनीमत यह रही कि मकान में सोई हुई पत्नी और वह बच गए। हालांकि तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर त्रिपाल तो दी लेकिन त्रिपाल से बरसात के मौसम में और तूफान और तेज हवाओं के कारण पानी फिर भी अंदर घुसता रहा। परिवार को दिन और रात गुजारना मुश्किल हो गया, फिर स्थानीय समाजसेवी लोगों ने जब मीडिया में इस मामले को उछलता देखा तो कुछ लोगों ने पैसे की मदद करके उनके लिए टीन की व्यवस्था की। लेकिन सभी के दिल में यही बात बार-बार दस्तक दे रही थी कि सरकार की कितनी योजनाएं गरीबों के लिए चलाई जा रही है आवास योजना में। लेकिन इन आवास योजनाओं का गरीबों तक लाभ क्यों नहीं मिल पाता अजीत जैसे यह लोग सारी उम्र कच्चे मकानों में गुजार देते हैं। वोटों के समय तो नेता इनको याद करते हैं लेकिन फिर इन गरीबों की कोई सुध नहीं लेता।
बार-बार प्रशासन से लगाई गुहार, मिला बस आश्वासन
अजीत सिंह का कहना है कि बार-बार प्रशासन से गुहार लगा चुका है पंचायत से गुहार लगा चुका है नेताओं से गुहार लगा चुका है लेकिन मिला तो बस आश्वासन। हालांकि प्रशासन ने उसे जगह दी है लेकिन जहां पर उसे घर बनाने के लिए जगह दी है, वे सलाइड एरिया है। इसलिए वहां पर मकान बनाना मुमकिन नहीं है। उसने सरकार से मांग की है कि उसे सुरक्षित जगह प्रदान की जाए और मकान बनाने के लिए सरकारी योजनाओं से पैसा भी दिया जाए ताकि वह गरीब अपना जीवन अच्छी तरह से गुजर बसर कर सके।
