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किशाऊ बांध परियोजना का रास्ता साफ, हिमाचल पर नहीं पड़ेगा 2,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ

Chandrika
Chandrika 2 Min Read
Updated 2026/06/17 at 7:37 PM
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शिमला -: हिमाचल प्रदेश को किशाऊ बांध परियोजना में बड़ी राहत मिली है। केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में आठ वर्षों से लंबित वित्तीय विवाद का समाधान हो गया। इसके तहत परियोजना के विद्युत घटक पर आने वाली लगभग 2,000 करोड़ रुपये की लागत हिमाचल प्रदेश के बजाय परियोजना से लाभान्वित होने वाले अन्य राज्य वहन करेंगे।लगभग 15,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 422 मेगावाट क्षमता की किशाऊ बांध परियोजना टौंस नदी पर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर प्रस्तावित है। बैठक में यह सहमति बनी कि जल घटक से लाभान्वित होने वाले दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा राज्य हिमाचल प्रदेश के हिस्से की विद्युत लागत का वहन करेंगे।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बैठक में हिमाचल प्रदेश का पक्ष रखते हुए कहा कि परियोजना से विस्थापन और अन्य प्रभावों का सबसे अधिक असर प्रदेश पर पड़ेगा। ऐसे में राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना उचित नहीं था। उन्होंने बताया कि पूर्व सरकार ने परियोजना में राज्य के हिस्से के रूप में 800 करोड़ रुपये देने पर सहमति जताई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने सीमित संसाधनों को देखते हुए इसे स्वीकार नहीं किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार परियोजना के जल घटक के लिए 90 प्रतिशत अनुदान दे रही है, इसलिए विद्युत घटक के लिए भी समान सहायता मिलनी चाहिए थी। उन्होंने इसे प्रदेश हितों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।परियोजना के पूरा होने के बाद हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 100 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 600 करोड़ रुपये सालाना होगी। इससे राज्य के राजस्व और वित्तीय संसाधनों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।बैठक में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री तथा संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

TAGGED: Shimla CM Sukhwinder singh sukhu
Chandrika June 17, 2026
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