राहुल चावला , शाहपुर: महिलाओं के उत्थान के मद्देनजर अगर सियासी चश्मे से समूचे हिमाचल प्रदेश को देखा जाए तो वो कांगड़ा जनपद का शाहपुर हलका एकमात्र ऐसा हलका है जिसने सरवीण चौधरी के तौर पर महिला उम्मीदवार को न केवल मान सम्मान दिया बल्कि उन्हें उस मुकाम तक पहुंचाया है कि भाजपा की सरकार बने तो उन्हें कैबिनेट रैंक न देने का तो कोई सवाल ही नहीं उठता। आज भी सरवीण चौधरी प्रदेश सरकार में इकलौती महिला मंत्री है, लेकिन इस बार के चुनाव में सरवीण चौधरी की राह इतनी आसान नहीं होने वाली है।
साल 2007 से प्रदेश की सियासत में निरंतर अपना वर्चस्व कायम करने वाली कैबिनेट मंत्री सरवीण चौधरी के समक्ष इस बार कोई और नहीं बल्कि अपनी ही पार्टी के लोग परेशानी और बाधा बन सकते हैं। वजह यह है कि शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले और बीते ढाई दशकों से भाजपा में सिपाही की तरह रात-दिन अपना फर्ज निभाने वाले कमल शर्मा ने भी इस बार भाजपा के टिकट पर अपनी दावेदारी जताई है। भाजपा के पास इस वक्त शाहपुर में सरवीण चौधरी के अलावा अगर कोई प्रवल दावेदार है तो वो कमल शर्मा ही नजर आ रहे है।
कमल शर्मा की मानें तो उन्होंने पार्टी आला कमान से खुद को टिकट दिए जाने की पैरवी की है। यह इसलिए क्योंकि पार्टी प्रमुखों ने हर कार्यकर्ता को इतनी छूट दे रखी है कि वो पार्टी के मंच पर टिकट मांग सके। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा की ओर से उन्हें टिकट दे दी जाती है तो उन्हें बहुत खुशी होगी और अगर टिकट नहीं मिलती है तो भी वह भाजपा में रहकर ही पार्टी के लिए काम करेंगे।
कमल शर्मा ने कहा कि अगर उन्हें शाहपुर की कमान मिलती है तो वो शाहपुर के उन क्षेत्रों को पर्यटन की लिहाज से विकसित करना चाहेंगे जहां रोजगार और राजस्व दोनों की आपार संभावनाएं है। कमल शर्मा ने कहा कि कोविडकाल हम सब के लिए चुनौतिपूर्ण काल था, बावजूद इसके उन्होंने शाहपुर की 54 पंचायतों में रात दिन एकमुश्त काम करते हुए हर मजबूर और मजलूम तक अपने सहयोग के हाथ पहुंचाए हैं। वहीं मेडिकल किट्स, बीएमओ के जरिये एसडीएम धर्मशाला को सौंपकर लोगों का सहयोग करने में हर हाल में मदद की है। उन्होंने कांग्रेस के विकास न करने के सवाल पर कहा कि विकास एक निरंतर प्रक्रिया है जो कभी खत्म नहीं होगी। मगर हां जिस क्षेत्र में होना चाहए वहां कुछ कमियां जरूर हैं उन्हें मजबूत करने का भरसक प्रयास करेंगे।
