संजु चौधरी,शिमला: प्रदेश सरकार की ओर से प्रदेश के कर्मचारी वर्ग को राहत देते हुए ओपीएस बहाल करने के बाद से प्रदेश में कर्मचारियों के अन्य संगठन जो अपनी मांगों को लेकर काफ़ी लंबे समय से आंदोलनरत हैं उनकी उम्मीद भी वर्तमान सरकार से जुड़ चुकी हैं। यही वजह है कि प्रदेश में नौकरी की राह ताक रहे तीन हजार के करीब करुणामूलक परिवारों को भी अब कांग्रेस सरकार से आस बंध गई हैं।
गुरुवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मिलने और अपनी समस्याओं का समाधान पाने की आस में करुणामूलक संघ के लोग भी सचिवालय पहुंचे। बड़ी संख्या में अपनी मांगों को लेकर सचिवालय पहुंचे करुणामूलक संघ के लोग उम्मीद जता रहे हैं की ओपीएस संगठनों की तर्ज पर मुख्यमंत्री सुक्खू उनकी बातों को सुनेंगे और उनकी मांगों को पूरा करेंगे। प्रदेश में 3000 करुणामूलक परिवार हैं जिनके केस पैंडिंग है। पिछली सरकार के दौरान करुणामूलक संघ के लोगों ने लंबे वक्त तक आंदोलन भी किया मगर कोई संतोषजनक समाधान न मिला।
करुणामूलक संघ पिछले काफी समय से अपनी मांगों को लेकर प्रदेश में आंदोलनरत है। करुणामूलक संघ के लोगों की मांग है की 3000 करुणामूलक परिवारों को नौकरी का प्रबंध किया जाए। पिछली सरकार के दौरान कुल 5000 परिवारों को करुणामूलक के आधार पर नौकरी की आस थी जिममें 2000 की भर्ती हुई। अभी प्रदेश में 3000 करुणामूलक परिवारों का आंकड़ा है जिन्हें नई सरकार से नौकरी की आस हैं।
मीडिया से बातचीत के दौरान करुणामूलक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार ने बताया कि करुणामूलक परिवार के लोग सचिवालय मे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को बधाई देने पहुंचे हैं। इस दौरान करुणामूलक संघ मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को अपनी मांगे भी सौंपेगा। करुणामूलक संघ प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू जिस प्रकार से ओपीएस बहाल करके ओपीएस संगठनों के लिए नायक बनकर उभरे, ठीक उसी प्रकार से वह करुणामूलक संघ के लिए भी नायक बनेंगे। इस दौरान अजय ने कहा कि भूतपूर्व सरकार को करुणामूलक संघ की मांग ना सुनने का खामियाजा भी भुगतना पड़ा और अब उन्हें नई सरकार से उम्मीद है की यह सरकार करुणामूलक संघ की मांगों को पूरा करने का प्रयास करेगी।
