मंडी :धर्मवीर (TSN)- जंगलों में आग लगने का मुख्य कारण चीड़ की पत्तियां मानी जाती है। चीर ऊर्जा परियोजना अब इन चीड़ की पत्तियों का बेहतर इस्तेमाल करने जा रही है। मंडी जिला की स्नाेर घाटी के टेपर में चीर ऊर्जा परियोजना के तहत चीड़ की पत्तियों व लकड़ी के बुरादे के साथ बायो फ्यूल ईंटें बनाई जाएगी। इनकी मांग फार्मा कंपनियों के अलावा सीमेंट कंपनियों में अधिक रहती है।
खास बात ये है कि इस परियोजना को ऊंचाई वाले क्षेत्र में स्थापित किया गया है,जहां चीड़ की पेड़ उपलब्ध हैं। जिले में अब बायो फ्यूल ईंटें बनना शुरू हो गई है। इसका सीधा आगामी फायर सीजन में देखने को मिलेगा। परियोजना में स्थापित मशीन आठ घंटे बायो फ्यूल चार टन ईंटे बनाने में सक्षम है। इसमें 80 प्रतिशत चीड़ की पत्तियां व 20 प्रतिशत लकड़ी का भूरा शामिल रहता है। कैनरा एचएसबीसी लाइफ इंश्योरेंस के माध्यम से लगाई गई इस परियोजना का संचालन आश्रय फाउंडेशन करेगा। जबकि आईआईटी मंडी का इसमें तकनीकी सहयोग रहेगा। इस परियोजना के सफल संचालन के बाद अन्य जगहों में भी इस तरह की परियोजना लगाने का मार्ग प्रशस्त होगा।
चीड़ की पत्तियों के उपयोग से ईंधन के उत्पादन के साथ वनों की आग और ऊर्जा संकट जैसे मामलों से निपटने में मदद मिलेगी। वहीं यह कदम लोगों की आर्थिकी सुदृढ़ करने और रोजगार उपलब्ध करवाने में महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। आश्रय फाउंडेशन से परियोजना समन्वयक सुरभि ने बताया कि जंगलों में चीड़ की पत्तियां गिरी हुई होती हैं। इन्हें स्थानीय स्वयं सहायता समूह की महिलाएं उपलब्ध करवाएंगी। इसकी एवज में उन्हें भुगतान किया जाएगा। इन चीड़ की पत्तियों व लकड़ी के भूरे को मिलाते हुए मशीन के जरिये बायो फ्यूल ईंटे तैयार की जाएंगी। इन्हें काेयले की जगह ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। उद्घाटन कार्यक्रम में अजय मेहता प्रमुख कैनरा एचएसबीसी लाइफ इंश्योरेंस, नलीन जोहरी कार्यकारी निदेशक आश्रय फाउंडेशन, वन अधिकारी मेहर सिंह व अन्य मौजूद रहे।
