हमीरपुर, अरविन्द-:हिमाचल प्रदेश सरकार की प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) जिला हमीरपुर के बागवानों के लिए वरदान साबित हो रही है। जल संरक्षण और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उद्यान विभाग हमीरपुर द्वारा इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। अधिक से अधिक बागवानों को योजना का लाभ दिलाने के लिए विभाग ने इसी माह विभिन्न स्थानों पर जागरूकता शिविर आयोजित करने की तैयारी पूरी कर ली है।
इन शिविरों के माध्यम से बागवानों को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत मिलने वाली सुविधाओं, आवेदन प्रक्रिया, अनुदान प्रावधानों और ड्रिप व स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई प्रणालियों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। विभाग का उद्देश्य है कि जिले का प्रत्येक पात्र बागवान इस योजना से जुड़े और सीमित जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कर अपनी आय में वृद्धि कर सके।उद्यान विभाग हमीरपुर के उप निदेशक राजेश्वर परमार ने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका लाभ हमीरपुर जिले के बागवानों को भी निरंतर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न सरकारी योजनाओं और एचपी शिवा परियोजना के तहत जिले में बड़े पैमाने पर फलदार पौधों का रोपण किया जा रहा है। अब तक लगभग 8000 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण का लक्ष्य हासिल किया जा चुका है, जबकि वर्ष 2027 तक इसे बढ़ाकर 9000 हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने बताया कि इतने बड़े क्षेत्र में लगाए गए फलदार पौधों के लिए सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है। बदलते मौसम और अनियमित वर्षा के कारण कई बार पौधों को आवश्यक समय पर पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता, जिससे उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने बताया कि इतने बड़े क्षेत्र में लगाए गए फलदार पौधों के लिए सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है। बदलते मौसम और अनियमित वर्षा के कारण कई बार पौधों को आवश्यक समय पर पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता, जिससे उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
राजेश्वर परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत टपक सिंचाई प्रणाली इस समस्या का प्रभावी समाधान बनकर उभरी है। ड्रिप सिंचाई से पौधों की जड़ों तक सीधे और नियमित रूप से पानी पहुंचता है, जिससे जल की बचत होती है और फसलों की गुणवत्ता व उत्पादन में सुधार होता है। उन्होंने बताया कि ड्रिप सिंचाई अपनाने से फल उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने पहले से लाभान्वित बागवानों के साथ-साथ नए इच्छुक बागवानों के लिए विशेष कार्यशालाओं के आयोजन का प्रस्ताव निदेशालय को भेजा है। स्वीकृति मिलते ही इन कार्यशालाओं के माध्यम से बागवानों को तकनीकी और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, ताकि वे योजना का अधिकतम लाभ उठा सकें।
Chandrika
