शिमला | केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने शिमला में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार पर राजस्व घाटा अनुदान के मुद्दे पर विफलता का ठीकरा केंद्र पर फोड़ने का आरोप लगाया। शेखावत ने कहा कि आरडीजी केवल अस्थायी वित्तीय सहायता थी और केंद्र ने हिमाचल सहित अन्य राज्यों को अपने राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए पर्याप्त सहयोग दिया।
उन्होंने बताया कि 12वें वित्त आयोग से यह प्रावधान बार-बार चेतावनी के साथ लागू किया गया, लेकिन इसे कभी स्थायी व्यवस्था नहीं माना गया। कोविड जैसी असाधाण परिस्थितियों में 15वें वित्त आयोग ने राज्यों को फ्रंट-लोडेड और रिकॉर्ड स्तर की सहायता प्रदान की। हिमाचल प्रदेश को भी पिछली अवधियों की तुलना में अधिक आरडीजी सहायता मिली, फिर भी राज्य सरकार इसका ठीक से उपयोग करने में विफल रही।
व्यय अनुशासन और कर्ज पर चिंता:
शेखावत ने कहा कि अब वित्त आयोग ने स्पष्ट किया है कि राज्यों को राजस्व बढ़ाने और व्यय अनुशासन अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाने होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि हिमाचल का कर्ज-जीडीपी अनुपात 40 प्रतिशत से ऊपर पहुंचना गंभीर संकेत है और राज्य को लंबी अवधि के वित्तीय अनुशासन के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
मंत्री ने कहा कि वित्तीय घाटा केवल राजनीतिक बयानबाजी का विषय नहीं है, बल्कि इसे संरचनात्मक सुधारों से ही ठीक किया जा सकता है। उन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने पिछले 11 वर्षों में निर्णायक नीतियों और सुधारों की बदौलत वैश्विक अर्थव्यवस्था में शीर्ष स्थान हासिल किया है।
अंतरराष्ट्रीय समझौतों में किसानों के हित सुरक्षित:
शेखावत ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील और यूरोपियन यूनियन के साथ समझौतों पर कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि स्थानीय किसानों और बागवानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने सेब के मामले में कांग्रेस पर अनावश्यक राजनीति करने का आरोप लगाया और स्पष्ट किया कि भारत में आयातित सेब न्यूनतम 100 रुपए की लैंडिंग कीमत से कम नहीं हो सकता।
आपदा प्रबंधन में केंद्र का योगदान:
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के मद्देनजर केंद्र सरकार ने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ फंड में कई गुना वृद्धि की है और राज्यों को प्रिवेंटिव उपायों पर खर्च की अनुमति दी है। उन्होंने हिमाचल सरकार से आग्रह किया कि जलवायु परिवर्तन और आपदा-पूर्व तैयारी में और निवेश किया जाए।
