भावना शर्मा, शिमला(TSN): हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के चलते आई आपदा के बाद अभी हाल ही में कांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रदेश का दो दिवसीय दौरा किया। अपने इस दौरे के दौरान उन्होंने प्रदेश में जहां आपदा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया तो वहीं उन्होंने आपदा प्रभावितों से भी मुलाक़ात कर उनका दर्द जाना। हिमाचल के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद ओर लोगों से मिलने के बाद प्रियंका गांधी वाड्रा ने हिमाचल ओर हिमाचलियों के दर्द और नुकसान को बेहद क़रीब से देखा। अब इस दौरे के बाद उन्होंने देश के प्रंधानमंत्री के नाम एक पत्र लिखा हैं।
अपने इस पत्र के माध्यम से उन्होंने प्रधानमंत्री के समक्ष हिमाचल के हालातों को बयां करने के साथ ही आपदा प्रभावितों का दर्ज भी उनसे सांझा किया हैं उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हिमाचल में आई इस प्राकृतिक आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की अपील भी की हैं।
उन्होंने अपने पत्र में लिखा हैं कि हिमाचल देवभूमि होने के साथ-साथ सच्चे, सरल और मेहनती लोगों का प्रदेश है। हिमाचल की महिलाएं, किसान, कर्मचारी, कारोबारी और युवा बहुत परिश्रमी और स्वाभिमानी हैं। आज की तारीख में वही लोग अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहे हैं। राज्य में आई बाढ़ और भूस्खलन से भीषण विनाश हुआ हैं।
पिछले दिनों मैं शिमला, कुल्लू, मनाली और मंडी में आपदा पीड़ितों से मिली। हर तरफ हुई तबाही देखकर बहुत दुःख हुआ। अब तक इस आपदा में 428 लोगों ने जान गवांई हैं कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपने सभी परिजन इस आपदा में खो दिए। मृतकों में छोटे बच्चे भी शामिल हैं, जो अपनी माताओं के साथ सावन के अंतिम सोमवार को सुबह-सुबह शिव मंदिर में पूजा करने गए थे। राज्य में 16,000 से ज्यादा पशु-पक्षी मारे गये हैं जिनमें 10,000 से अधिक पोल्ट्री बर्ड और 6,000 से अधिक गाय, भैंसे व अन्य पालतू जानवर हैं। 13,000 से ज्यादा घर और मकान पूरी तरह या आंशिक रूप क्षतिग्रस्त हुए हैं। शिमला से परवाणू राष्ट्रीय राजमार्ग और कुल्लू-मनाली-लेह राजमार्ग के बड़े-बड़े हिस्से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गये हैं। राज्य की अनेक सड़कें पूर्णतः या अंशतः टूट चुकी हैं। प्रदेश को हजारों करोड़ का नुकसान हुआ हैं।
इस तबाही से निपटने के लिए राज्य सरकार अपने स्तर पर हरसंभव प्रयास कर रही हैं। मैंने हिमाचल की जनता को राज्य सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संकट का सामना करते हुए देखा। कहीं कोई सड़क की मरम्मत के लिए श्रमदान में जुटा है तो कहीं आपदा प्रभावित लोग, स्कूली बच्चे, किसान आपस में चंदा जुटाकर राहत कार्यक्रमों में मदद कर रहे हैं। एकजुटता की इस भावना से मैं बहुत प्रभावित हुई। इसी भावना के साथ मैं आपको यह पत्र लिख रही हूं।
इस त्रासदी में, जब हिमाचल की जनता मदद की उम्मीद में चारों ओर देख रही है, उसी समय केंद्र सरकार की ओर से विदेशी सेब पर आयात ड्यूटी घटाने से हिमाचल के सेब किसानों और बागबानों पर दोहरी आर्थिक मार पड़ेगी। मेरी समझ में, इस मुश्किल वक्त में किसानों को ऐसी चोट नहीं देनी चाहिए बल्कि केंद्र सरकार की ओर से हिमाचल के किसानों को किसी भी तरह की आर्थिक मदद मिल पाये तो उन्हें सहूलियत मिलेगी।
मैं आपसे अपील करती हूं कि इस आपदा को 2013 की केदारनाथ त्रासदी की तरह राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए और पीड़ितों व राज्य को आर्थिक मदद पहुंचाई जाए ताकि हिमाचल के भाई-बहनों को राहत मिले और राज्य का समुचित ढंग से पुनर्निर्माण किया जा सके।
आज पूरा देश आगे बढ़कर हिमाचल के साथ खड़ा हो रहा हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि आप हिमाचल की जनता के प्रति संवेदनशीलता रखते हुए मदद के उचित कदम उठाएंगे।
