राजेंद्र राणा ने कहा कि राज्य सरकार ने आपदा प्रभावितों को सात लाख रुपये देने की घोषणा जरूर की थी, लेकिन चार महीने बीत जाने के बावजूद एक भी परिवार को पूरी राहत राशि नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से अब तक प्रभावित परिवारों को सिर्फ 25-25 हजार रुपये, जबकि स्थानीय विधायक की ओर से पांच-पांच हजार रुपये की सहायता दी गई है, जो अत्यंत अपर्याप्त है। उनके अनुसार, स्थानीय विधायक को चाहिए था कि विधानसभा में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाते, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।राणा ने कहा कि वे स्वयं चबूतरा में प्रभावित परिवारों के घर जाकर उनकी स्थिति का आकलन कर चुके हैं और निजी स्तर पर उनकी मदद भी की है। उन्होंने बताया कि वे पिछले 25 वर्षों से सर्व कल्याणकारी संस्था के माध्यम से सामाजिक सेवा कार्य कर रहे हैं। संस्था अब तक 7200 से अधिक बेटियों की शादी में सहयोग, पूर्व सैनिकों और सैनिक परिवारों का सम्मान, तथा कई जरूरतमंदों की आर्थिक सहायता और इलाज जैसी सेवाएँ दे चुकी है।उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी संस्था को लेकर स्थानीय विधायक को आखिर परेशानी क्या है?
राणा ने कहा कि विपक्ष का दायित्व सरकार की कमियों की ओर ध्यान आकर्षित करना है, और प्रदेश सरकार की घोषित दस गारंटियों को लेकर वे निरंतर सवाल उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि मजबूत विपक्ष का होना किसी भी लोकतंत्र के लिए आवश्यक है और वे भाजपा प्रवक्ता के रूप में यह भूमिका पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं।
