Hamirpur, Arvind-:हिमाचल प्रदेश प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन का राज्य स्तरीय सम्मेलन हमीरपुर के हिम अकैडमी पब्लिक स्कूल, विकास नगर में आयोजित किया गया। सम्मेलन में प्रदेश के दस जिलों से आए निजी स्कूलों के संचालकों और प्रबंधकों ने भाग लिया। इस दौरान संगठन ने प्रदेश सरकार की उन नीतियों पर आपत्ति जताई, जिनसे निजी स्कूलों और उनके विद्यार्थियों को प्रभावित होने की आशंका है।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जगजीत सिंह ठाकुर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को दी जाने वाली लैपटॉप योजना से निजी स्कूलों के छात्रों को बाहर रखना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी प्रदेश के ही नागरिक हैं और उन्हें सरकारी छात्रों की तरह ही समान अवसर मिलना चाहिए। इसलिए सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।उन्होंने यह भी मांग रखी कि कक्षा तीसरी, पांचवीं और आठवीं की वार्षिक परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाएं निजी स्कूलों में ही क्लस्टर स्तर पर जांचने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि संबद्धता के लिए विभाग या बोर्ड के पास जमा करवाए जाने वाले दस्तावेजों को बार-बार मांगे जाने की प्रक्रिया समाप्त की जानी चाहिए, ताकि स्कूलों को अनावश्यक परेशानी न हो। एक बार दस्तावेज जमा होने के बाद उन्हें पुनः प्रस्तुत करने की बाध्यता नहीं होनी चाहिए।
स्कूल वाहनों की फिटनेस वैधता अवधि को 15 वर्ष से बढ़ाकर 20 वर्ष करने की मांग भी बैठक में प्रमुख रूप से उठाई गई। इसके अलावा, निजी स्कूलों में अध्यापकों और अन्य कर्मचारियों के रिक्त पदों की सीमा बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने की मांग भी सरकार के समक्ष रखी गई।जब सरकारी स्कूलों को CBSE बोर्ड में बदलने संबंधी निर्णय पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड पहले से ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा है। ऐसे में केवल बोर्ड बदलने से शिक्षा स्तर में सुधार होगा, यह कहना उचित नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि यह सरकार का निर्णय है और संगठन इसकी आलोचना नहीं करना चाहता।जगजीत सिंह ठाकुर ने प्रदेश के सभी निजी स्कूलों से एकजुट होकर संगठन के साथ जुड़ने की अपील की, ताकि सामूहिक रूप से समस्याओं का समाधान करवाने में आसानी हो सके। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में दस जिलों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और अपनी समस्याएं साझा कीं।
