बिलासपुर/सुभाष ठाकुर: शिक्षण संस्थानों में छात्र संघ की एक अलग भूमिका रही है। कई दिग्गजों ने छात्र संघ से राजनीति में अपनी जगह बनाई है। इनमे एक नाम प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामलाल ठाकुर का है। बिलासपुर नैनादेवी विधानसभा क्षेत्र से तालुक रखने वाले राम लाल ठाकुर अब 9वीं बार चुनावी मैदान में उतरेंगे। बिलासपुर जिला का नयनादेवी विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस का मजबूत किला रहा है। वरिष्ठ नेता रामलाल ठाकुर को पार्टी की तरफ से हरी झंडी मिल चुकी है। बता दे कि उन्होंने 8 बार चुनाव में भाग्य आजमाया और 5 चुनाव जीते , वहीं तीन बार हार का पराजय का सामना करना पड़ा।

विधायक राम लाल ठाकुर का जन्म 7 जून, 1951 को ग्राम घियाल, पीओ नामहोल, तहसील सदर, जिला में हुआ था। उन्होंने एचपीयू से एलएलबी (1976) और कार्मिक प्रबंधन और श्रम कल्याण में स्नातकोत्तर डिप्लोमा (1978) में किया था। छात्र राजनीति की बात की जाए तो वे डिग्री कॉलेज, बिलासपुर में 1970 में केंद्रीय छात्र संघ एनएसयूआई के महासचिव रहे। वहीं हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में लॉ कॉलेज का प्रतिनिधित्व भी किया। राम लाल ठाकुर 18 नवंबर 1976 को शिमला में ‘ जेल भरो आंदोलन’ के दौरान गिरफ्तार किए गए थे।
पांच बार जीत दर्ज करवा चुके रामलाल
प्रदेश कांग्रेस विधायक राम लाल ठाकुर एक अनुभवी राजनीतिज्ञ रहे है। नैनादेवी विस् कांगेस का गढ़ माना जाता है। 1985 में विधानसभा चुनाव में पहली बार रामलाल ठाकुर को कांग्रेस से मैदान में उतारा गया। अपने प्रतिद्वंद्वि दौलतराम शर्मा की जमानत करवाकर रामलाल ठाकुर को पहली बार चुनाव जीतने पर तत्कालीन सरकार में आयुर्वेदा एवं खेल मंत्री बनाया गया था। 1990 में रामलाल ठाकुर भाकपा की तरफ से चुनाव में उतारे गए व केके कौशल से हार गए थे और इस चुनाव में दौलतराम सांख्यान को 800 वोट ही मिल पाए । जिसके चलते उनकी जमानत जब्त हो गई थी। 1993 में सदर बिलासपुर में जेपी नड्डा की एंट्री के चलते भाजपा ने कोटकहलूर से सदाराम को टिकट दिया था, लेकिन इस चुनाव में रामलाल ठाकुर विजयी हुए और सदाराम ठाकुर छह हजार वोट ही मिलने की वजह से तीसरे नंबर पर चले गए थे। इस बार रामलाल ठाकुर को सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के पद से नवाजा गया था।
2003 में रामलाल ठाकुर ने विजय प्राप्त कर सरकार बनने पर उद्योग मंत्रालय पाया। यहां तक कोटकहलूर हलके में रामलाल ठाकुर का वर्चस्व कायम रहा, लेकिन 2007 में रणधीर शर्मा ने कांग्रेस के किले में सेंध लगा दी और कांग्रेस प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में रणधीर शर्मा को 4954 वोट पड़े थे, जबकि लगातार दूसरी बार 2012 के इलेक्शन में भी रणधीर शर्मा का परचम कायम रहा और पिछले दो इलेक्शन से कोटकहलूर हलके में भाजपा अपना झंडा बुलंद किए रहे। खास बात यह है कि पिछले चुनाव में इस हलके का नामकरण नयनादेवी कर दिया गया है। 2017 में फिर यह सीट कांग्रेस की झोली में आ गई।
राजनीतिक भविष्य दांव पर
अब 2022 के चुनाव में रामलाल ठाकुर हलके में करवाए गए विकास के दम पर लड़ेंगे और जीत के लिए पूरी तरह से आश्वस्त हैं। एमएलए रामलाल ठाकुर हलके में दी गई सेवाओं व करवाए गए विकास के दम पर चुनाव में उतरेंगे और अब तक के राजनीतिक सफर में नयनादेवी के विकास के लिए दिए गए योगदान के बल पर जनता के बीच जाएंगे ।
