शिमला: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रोफेसर पदों पर हुई भर्तियों को लेकर एक बड़ा खुलासा आरटीआई के माध्यम से हुआ है। आरटीआई में मिली जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय में फर्जी और नकली अनुभव के आधार पर प्रोफेसर भर्ती की गई है। अब इस पूरे मामले को लेकर एसएफआई ने न्यायिक जांच की मांग करने के साथ ही विश्वविद्यालय में नई भर्तियों पर रोक लगाने की भी मांग की है।
एसएफआई का कहना है कि करोना काल में विश्वविद्यालय के टीचिंग स्टाफ में हुई भर्तियों में धांधली की गई है जिसमें सभी यूजीसी नियमों को दरकिनार किया गया है। एसएफआई ने मामले में न्यायिक जांच की भी मांग की है। गुरुवार को शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में एसएफआई विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष और रॉकी नहीं बताया कि आरटीआई से जुटाई गई 13 हजार पन्नों की सूचना से यह साबित हुआ है कि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर की भर्ती में नकली व फर्जी अनुभवों के आधार पर नियुक्तियां दी गई।
उन्होंने मांग की है कि इस फर्जीवाड़े क़ी न्यायिक जांच होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भी विश्वविद्यालय में चुनावों से पहले कुछ ओर भर्तियां कर अपने लोगों को फर्जी तरिके से भर्ती करना चाह रही है इसलिए नई भर्तियों पर भी रोक लगाने की मांग एसएफआई की ओर से की गई है। एसएफआई इस फर्जीवाड़े के खिलाफ जल्द विश्वविद्यालय एवं पूरे प्रदेश में आंदोलन करेगी।
