बिलासपुर : सुभाष ठाकुर -हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी एवं अल्पसंख्यक वर्ग संयुक्त संघर्ष मोर्चा द्वारा ईद उल फितर का त्योहार बिलासपुर की जामा मस्जिद में बड़ी धूमधाम से मनाया गया। इतिहास में यह पहला मौका था जब संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले इस प्रकार ईद मिलन कार्यक्रम एकजुटता के साथ मनाया गया।
मोर्चा के जिलाध्यक्ष एवं सेवानिवृत डीएसपी सीता राम कौंडल की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम को जामा मस्जिद कमेटी बिलासपुर के प्रधान हारून मोहम्मद ने बड़ी शिद्दत से मुकम्मल किया। इस अवसर पर मौलवी असराल मुजाहिरी ने ईद पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला। जबकि प्रधान सीताराम कौंडल, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी डीआर भाटिया, महासचिव नंद लाल आचार्य, प्रधान जामा मस्जिद कमेटी हारून मोहम्मद ने सभी को इस पर्व की बधाई दी व प्रसन्नता व्यक्त की।
वहीं साबर दीन ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान में यदि एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक खाने कमाने के लायक हुआ है तो वह बाबा साहेब डा. भीम राव अंबेडकर की देन है। उन्होंने कहा कि इस वर्ग की एकता की हर समस्या का हल है। क्योंकि विघटनकारी ताकतें हमारे समाज में प्रवेश कर चुकी हैं तथा लोगों को फूट डालो राज करो की राजनीति अब समझ में आ रही है। उन्होंने हैरानी व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में लोग बाबा साहेब के कारण पढ़ लिख गए हैं तथा जिस कारण वे काबिल बने हैं उसी को भूल गए हैं। बाबा साहेब ने अपना सारा जीवन दलितों , पिछड़ों और दबे कुचले लोगों को उपर उठाने में लगा दिया है। ऐसे में उनको भुलाना समाज की मूर्खता है। उन्होंने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि आज सभी लोग इस बात को समझ रहे हैं तथा इसी एकजुटता का संदेश देश के कोने कोने में जाएगा ताकि 15 प्रतिशत लोग 85 प्रतिशत जनता को बेवकूफ न बना सके। उन्होंने कहा कि आज लोगों को मूलनिवासी शब्द के मायने और इसकी गहराई को समझना होगा तभी समाज का उद्वार होगा। उन्होंने समूचे समाज से आग्रह किया है कि भले ही एक वक्त की रोटी मिले लेकिन अपने बच्चों को शिक्षा अवश्य दें। वहीं मोर्चा मंत्री नंद लाल आचार्य ने भी मानवता को ध्येय मानकर एकजुटता की बात कही।
