विकास शर्मा, चिंतपूर्णी: पानी की कीमत क्या होती है, इसका जबाव अगर चाहिए तो इन दिनों अप्पर बठरा गांव के निवासियों से बेहतर कोई नहीं बता सकता। पिछले एक सप्ताह से बरसात के मौसम में भी स्थानीय वासियों को पेयजल के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। गांववासियों की इस विकट समस्या की किसी ने सुध नहीं ली। वह पानी के लिए लाचार व बेवस दिखे। इसी बीच सामाजिक सरोकारों को माइक्राे मैनेजमेंट तरीके से निभा रहे कैप्टन संजय को इस समस्या के बारे में पता चला तो उन्होंने गांववासियों के लिए दो पानी के टैंकर भेजे है। साथ ही उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि जब तक पेयजल समस्या का समाधान नहीं हो जाता, तब तक क्षेत्रवासी उनसे पेयजल मंगवाने के लिए संपर्क कर सकते है।
दरअसल बठरा गांव में इन दिनों सड़क का कार्य चला हुआ है। इसी वजह से जेसीबी मशीन से पानी की पाइपें भी टूट गईं और गांव में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह से बाधित होकर रह गई। गांववासियों ने इस दिक्कत के बारे में विभाग के स्थानीय स्टाफ को भी अगवत करवाया, लेकिन पेयजल सप्लाई बहाल नहीं हो पाई। इसके बाद ग्रामीणों ने कैप्टन संजय से आग्रह किया कि उन्हें पीने की पानी की बूंद-बूंद के लिए तरसना पड़ रहा है और पेयजल उपलब्ध करवाया जाए। पराशर ने बिना देरी किए अप्पर बठरा में पानी के दो टैंकर भेज दिए। टैंकर पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने पराशर का आभार जताते हुए कहा कि संजय सही मायनों में समाज सेवा कर रहे हैं। स्थानीय वासियों पवन कुमार, परमेश्वरी दास, दविंद्र पाटयाल, कतार सिंह, सुदर्शन कुमार, प्रेम लता, सरोज कुमारी, शांता कुमारी, सतीश कुमार, रमेश सिंह, अमित चौहान और राज कुमार ने बताया कि संजय पराशर ने उनकी एक कॉल पर पेयजल की व्यवस्था की है। इससे पहले भी बठरा गांव के लिए संजय अपने संसाधनों का उपयोग करके स्थानीय जनता के लिए कार्य करते रहते है। संजय इससे पहले भी उन गांवों में पानी के टैंकर भेजते रहे है, जहां पेयजल की समस्या पेश आती है। इसी वर्ष गर्मी के मौसम में संजय ने कई गांवों में पानी के टैकरों से पेयजल पहुंचाया था।
पराशर का इस संदर्भ में कहना था कि अगर कहीं सड़क का कार्य चला हुआ है और उस वजह से पेयजल की समस्या पेश आने वाली है तो समय रहते विभागों को आपसी समन्वय बनाकर वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तंत्र का काम समस्याएं पैदा होने के बाद आंखे मूंदना नहीं, बल्कि उनका समाधान करना है। संजय पराशर ने कहा कि अगर उन्हें क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलता है तो वह यह घोषणा करते हैं कि अगर किसी गांव में तीन दिनों तक नलों में पानी नहीं आता है तो वह अगले दिन ही अपने खर्च से पेयजल टैंकर उक्त क्षेत्र में भेजने की व्यवस्था करेंगे और यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी, जब तक पेयजल संकट खत्म नहीं हो जाता। संजय ने कहा कि ऐसी समस्याओं को वह व्यवस्था परिवर्तन से स्थाई रूप से खत्म करना चाहते है।
