संजीव महाजन,नूरपुर: विकास खंड फतेहपुर की ग्राम पंचायत हरनोटा में पेशे से पेंटर रहे कैंसर पीड़ित पुष्पिंदर कुमार को बीपीएल सूची से बाहर कर दिया गया हैं। बीपीएल से बाहर होने के बाद अब पुष्पिंदर कुमार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। यही वजह भी हैं कि गुरुवार को पुष्पिंदर कुमार, सपुत्र लाल चंद गांव नियाल डाकखाना हरनोटा वार्ड नंबर पांच अपनी फरियाद लेकर एसडीएम ज्वाली के द्वार जा पहुंचा।
पुष्पिंदर कुमार ने बताया कि 16 अप्रैल की ग्राम सभा में उनका नाम बीपीएल से नाम काट दिया गया। जब से उनका नाम बीपीएल में डाला गया था तब से लेकर अभी तक सरकार की ओर से कोई भी लाभ उन्होंने नहीं लिया। पुष्पिंदर कुमार में बताया कि कुछ ऐसी भी पंचायत मव लोग है जो पहले बीपीएल में रहकर अपना मकान बनवा चुके हैं और वो इस बार दोबारा फिर बीपीएल में डाल दिए गए हैं। पुष्पिंदर कुमार ने बताया कि वह पहले पैंटर का काम करता था, लेकिन पांच साल पहले काम करते समय पौड़ी से गिरने की वजह से उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट आईं थी। तब से लेकर वह सीधा खड़े हो कर चल नहीं सकते।
पुष्पिंदर ने बताया कि उनकी दोनों टांगे एक्सीडेंट में टूट गई थी और अब कैंसर जैसी बीमारी में उन्हें जकड़ लिया हैं। उनका इलाज है टीएमसी कांगड़ा में चल रहा है जिसकी कीमो लगाने के लिए उन्हें हर रोज टीएमसी जाना पड़ता हैं। अब उनके पास कोई रोजगार नहीं है और उन्हें अपने परिवार का पालन पोषण करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं। ऐसे में बीपीएल में नाम होने के चलते उन्हें मेडिकल सुविधाओं में थोड़ा लाभ मिल रहा था लेकिन अब जब बीपीएल सूची से नाम हटा दिया गया है तो उन्हें यह लाभ भी नहीं मिल पा रहे हैं।
अब पुष्पिंदर ने अपनी इस समस्या से एसडीएम को भी अवगत करवाया हैं। इस बारे उन्होंने एसडीएम जवाली महेंद्र प्रताप सिंह को प्रार्थना पत्र देकर अपना नाम दोबारा से बीपीएल में डलवाने की मांग कि हैं, जिससे उन्हें मेडिकल जैसी सुविधाएं मिल सके।
वहीं बारे में जब पंचायत सदस्य सुरेश कुमारी से बात की गई तो उन्होंने बताया की हमें आदेश था कि पंचायत सदस्य सर्वे टीम के साथ बीपीएल के घरों में जाएं। नाम काटना सर्वें का अधिकार था, लेकिन यह पंचायतवासी कैसर से पीड़ित हैं और इसके पास कोई रोजगार भी नहीं हैं तो इसके साथ ऐसा नहीं होना चाहिए था। वहीं पंचायत प्रधान रक्षा देवी ने बताया कि यह कैंसर का मरीज था, इस समय इसे मेडिकल की जरूरत थी, नाम काटने में पंचायत का कोई भी रोल नहीं हैं। नाम काटने का काम सर्वे टीम ने किया हैं।
