Mandi, dharamveer –प्राकृतिक आपदा की मार झेल रही सराज घाटी में जिंदगी थम-सी गई थी। भूस्खलन और बाढ़ ने न केवल घरों को उजाड़ा, बल्कि उन पगडंडियों को भी निगल लिया जो गांवों को दुनिया से जोड़ती थीं। ऐसे विकट समय में राहत और बचाव में जुटे जवान लोगों के लिए किसी फ़रिश्ते से कम नहीं हैं।
जवानों की टोलियां भारी सामान पीठ पर उठाए, दुर्गम रास्तों से होकर गुजर रही हैं। ये सिर्फ राशन और दवाइयां नहीं पहुंचा रहे, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर वहीं प्राथमिक उपचार भी दे रहे हैं और फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल रहे हैं।
250 से ज्यादा जवान कर रहे सेवा का कार्य
मंडी के उपायुक्त अपूर्व देवगन के अनुसार, सराज क्षेत्र में फिलहाल 250 से अधिक जवान राहत और बचाव कार्यों में दिन-रात जुटे हैं। इन जवानों में सेना, वायुसेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, होमगार्ड और राज्य पुलिस बल के साथ-साथ कई स्वयंसेवी संस्थाएं जैसे निरंकारी मिशन भी शामिल हैं।
हर गांव तक पहुंचा रहे ज़रूरी सहायता
कुल्लू से आए 46 जवानों की टीम के साथ पहुंचे आईटीबीपी के असिस्टेंट कमांडर और मेडिकल ऑफिसर डॉ. रवनीश पराशर ने बताया कि उनका लक्ष्य है कि कोई भी व्यक्ति मदद से वंचित न रहे। उनकी टीम हर अभियान में राशन, दवाइयों और प्राथमिक चिकित्सा किट के साथ रवाना होती है। जहां आवश्यकता होती है, वहीं स्वास्थ्य जांच की जाती है और गंभीर रोगियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।
डॉ. पराशर ने भावुक होते हुए कहा, “जब लोग संकट में हों, तब उनकी मदद करना हमारे लिए कर्तव्य से बढ़कर सम्मान की बात है। हमारी पूरी कोशिश है कि हर जरूरतमंद तक राहत पहुंचे।”
