शिमला : कमल भारद्वाज (TSN)- हिमाचल प्रदेश में मानसून ने जो तबाही मचाई प्रदेश अब तक उस आपदा से निपटने में जुटा हुआ है ।प्रदेश सरकार पुनर्वास के काम में जुटी हुई है तो वहीं मदद के लिए केंद्र की ओर टकटकी लगाकर देख रही है ।इसको लेकर प्रदेश में राजनीति भी गर्म है, ऐसे में अब इसमें सीपीआईएम की एंट्री हुई है ।शिमला में प्रेस वार्ता के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया मार्क्सिस्ट ने प्रदेश सरकार से सभी राजनीतिक दलों के साथ एक बैठक करने की मांग की है । इसके अलावा सीपीआईएम ने केंद्र पर राजनीति के चलते प्रदेश की आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित न करने का आरोप लगाया है ।
10 हज़ार करोड़ की एक मुश्त राहत दे
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया मार्क्सिस्ट हिमाचल के राज्य सचिव ओंकार शाद ने कहा कि प्रदेश में आई आपदा को लेकर सीपीआईएम का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिला और प्रदेश सरकार को अपने सुझाव दिए ।उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को आपदा के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलानी चाहिए, जिसमें ब्लूप्रिंट तैयार करके केंद्र सरकार से राहत के लिए मांग की जाए ।उन्होंने मांग करते हुए कहा कि विधानसभा में रेजोल्यूशन लाकर वन संरक्षण कानून 1980 में छूट देने की जरूरत है ताकि आपदा में जमीन गंवा देने वाले लोगों को जमीन के बदले जमीन दी जा सके ।इसके अलावा उन्होंने किसानों को हुए नुकसान की भरपाई राशि 2000 प्रति बीघा से बढ़कर 10,000 प्रति बीघा करने की भी मांग की है ।
केंद्र राजनीतिक कारणों से नहीं कर रहा राष्ट्रीय आपदा घोषित
वहीं दूसरी ओर ओंकार शाद ने केंद्र सरकार के द्वारा अब तक हिमाचल प्रदेश में हुई तबाही को राष्ट्रीय आपदा न घोषित करने को लेकर कहा कि केंद्र सरकार राजनीतिक कारणों से हिमाचल प्रदेश की आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित नहीं कर रही है ।उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है तो केंद्र में भाजपा की और यही वजह है कि अब तक हिमाचल की आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित नहीं किया गया है ।जबकि इससे पहले भी इस तरह की आपदा जब उत्तराखंड जैसे देश के दूसरे राज्यों आई तो उसे राष्ट्र आपदा घोषित किया गया ।
