विकास शर्मा: हिमाचल प्रदेश में जसवां प्रागपुर विधानसभा क्षेत्र में जब समाज सेवा की बात हो तो यहां सबसे पहले समाजसवी संजय पराशर का नाम हर एक व्यक्ति की जुबां पर आता है। यह नाम अब किसी पहचान का मोहताज नहीं है क्योंकि समाजसेवा का जज्बा ही है जो कैप्टन संजय पराशर ने 2022 के विधानसभा चुनावों में राजनीति के रण में उतरने का फ़ैसला किया है। जसवां प्रागपुर के लोगों से मिल रहे समर्थन और स्नेह के चलते ही कैप्टन संजय पराशर ने विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है। वह इस विधानसभा क्षेत्र से उद्योग मंत्री विक्रम ठाकुर को सीधी चुनौती देने के लिए पूरी तरह से तैयार दिख रहे हैं, हालांकि संजय पराशर का राजनीति से कोई पुराना नाता नहीं है और ना ही उन्होंने पहले कोई चुनाव लड़ा है लेकिन क्षेत्र की जनता के लिए और उनके हितों के लिए वह काम करना चाहते हैं और इसीलिए अब उन्होंने राजनीति में आने का फैसला लिया है।
कैप्टन संजय पराशर का जन्म भारतीय वायु सेना के अधिकारीके घर गांव स्वाणा कांगड़ा में 27 अक्टूबर 1971 को हुआ। उन्होंने केंद्रीय विद्यालय में अपनी शिक्षा ग्रहण की और वर्ष 1990 में मर्चेंट नेवी में शामिल हुए। इसके बाद वर्ष 2010 में उन्होंने अपनी शिप मैनेजमेंट कंपनी स्थापित कर ली। अगर उनके वर्तमान व्यवसाय की बात की जाए तो उनकी कंपनी वीआर मेरीटाइम सर्विसेस प्रा. लिमिटेड है, जोकि 108 जहाजों का चालक दल प्रबंधन और 8 जहाजाें का तकनीकी प्रबंधन करती है। कंपनी के पास 3500 नाविकाें का स्टाफ है और 257 कर्मचारी भारत के विभिन्न 10 कार्यालयों में नियुक्त हैं। कंपनी का मुख्य कार्यालय मुंबई में है। कंपनी को समुद्री जहाजों के पुर्नचक्रण में महारत हासिल है। अब तक कंपनी 5 मिलीयन जीआरटी ग्रीन शिप री-साइक्लिंग कर चुकी है। कंपनी व्यवसायिक रूप से स्थिर है और व्यवसाय में साल दर साल बढ़ोतरी दर्ज हो रही है। टर्नओवर और वित्तीय लाभ के हिसाब से भारत में भर्ती और रोजगार देने में कंपनी 15 अग्रणी कंपनियों में शामिल है। इसके अलावा आईटी कंपनियों और शिपिंग ऐसोसिएशन के मैरीटाइम मैनेजमेंट सिस्टम के सलाहकार हैं। इसके साथ ही संजय पराशर ने हिमाचल प्रदेश में लघु उद्योग की स्थापना की है और हर्बल खेती के माध्यम से किसानों की आय दुगनी करने पर काम कर रहे हैं।
संजय पराशर वीआर मेरीटाइम सर्विसेस प्रा. लिमिटेड के संस्थापक व सीईओ होने के साथ ही। भारत सरकार के नैशनल शिपिंग बोर्ड के पूर्व सदस्य भी रहे हैं। इसके साथ ही वह हिमाचल सीफेर्रस एसोसिएशन के संस्थापक सदस्य भी है। संजय पराशर उपाध्यक्ष: थिंक टैंक फिन्स (फोर्म फॉर इंटेग्रेटेड नैशनल सिक्योरिटी) ओर उपाध्यक्ष: रेडियो (रेस्क्यूइंग एवरी डिस्ट्रेस्ड इंडियन ओवरसीस) भी है।
संजय पराशर चला रहे हिमाचल प्रदेश में समाज कल्याण के ये प्रोजेक्ट
वीआर मेरीटाइम सर्विसेस प्रा. लिमिटेड के हिमाचल प्रदेश में चार कंपनी कार्यालय संजय पराशर ने खोले है। 172 को कंपनी कार्यालयों में और 1100 को मर्चेंट नेवी में रोजगार। (वर्ष-2020-22)
2. विभिन्न गांवों में 103 मेडीकल कैंपों का आयोजन। नि:शुल्क मोतियाबिंद के ऑपरेशन, कानों की सुनने वाली मशीनें, चश्मे, आई ड्रॉप्स, दवाईयां उपलब्ध करवाई गईं। मेडीकल कैंपों में जसवां-परागपुर और आसपास के क्षेत्रों से शामिल हुए 45,898 लाभार्थी।
3. 2020-22: जन कल्याण की कई योजनाएं चलाईं, जिनमें निराश्रित महिलाओं को मासिक पेंशन, आर्थिक रूप से अक्षम लेकिन होनहार विद्यार्थियों को छात्रवृति, विभिन्न गांवों में 34 फ्री इंग्लिश लर्निंग व कंप्यूटर सेंटर्स, धार्मिक स्थलों का निर्माण व जीर्णोद्धार और सार्वजनिक स्थलों में विकास कार्य शामिल है। प्रागपुर और डाडासीबा में खोले गए प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्रों में सभी के लिए नि:शुल्क दवाईयों और सैनेटरी पैड्स वितरण का प्रावधान। अब तक 50,000 से अधिक स्थानीय वासियों ने उठाया लाभ।
4. कोविड-19 महामारी में पीएम रिलीफ फंड में 50 लाख रूपए का योगदान। सीएम रिलीफ फंड में पांच लाख रूपए का सहयोग। काेरोना के खिलाफ लड़ाई में तीन करोड़ रूपए की दवाईयां व मेडीकल उपकरण दिए।
5. शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, नारी सशक्तकीरण और गरीबी उन्मूलन जैसे सामाजिक सरोकारों को लेकर 152 प्रोजेक्ट्स पर कर रहे काम।
6. सरस्वती विद्या मंदिर प्रागपुर में साईंस ब्लॉक का निर्माण करवाया और विभिन्न शिक्षण संस्थानों के शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करने के लिए एक करोड़ रूपए से ज्यादा का डोनेशन दिया।
7. सामाजिक समरसता व आपसी सौहार्द व सद्भाव के लिए अब तक 23 महायज्ञों का विभिन्न गांवों में आयोजन।
यहां दिया जा रहा सामाजिक योगदान
कोविड-19 महामारी में 1527 विदेशों में फंसे नाविकाें व भारतीय नागरिकों की वतन वापसी के लिए सबसे बड़ा एयरलिफ्ट संजय पराशर ने करवाया था। अब तक विभिन्न कारणों से विदेशों में फंसे 240 नाविकों को सुरक्षित घर पहुंचा चुके हैं।
नाविकों के हित में किए यह कार्य
संजय पराशर की ओर से नाविकों के लिए ई-गर्वनेंस और डिजीटाइलेशन का डाटा उपलब्ध करवाने के साथ ही। नाविकों की शिकायतों के निपटारे के लिए ऑनलाईन सिस्टम। वर्ष 2021 में 3328 नाविकों के कागजात, प्रशिक्षण, राेजगार और मानवाधिकारों जैसे मुद्दों को सफलतापूर्वक हल किया। मर्चेट नेवी में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं। भारतीय तटों पर मछुआरों की सहायता करते हैं और उनके मानवाधिकार हनन मामलों को प्रमुखता से उठाते हैं। पराशर ने फिन्स के विभिन्न सेमीनारों का आयोजन और उनमें हिस्सा लेने के साथ ही समुद्र में मानवाधिकार-भारतीय नाविकों की स्थिति, अंर्तराष्ट्रीय मेरीटाइम संस्था में भारत की भूमिका पर रणनीतिकार। समुद्र में सुरक्षा व आंतकी धमकियों जैसे मामलों से निपटने के लिए विशेषज्ञ की भूमिका निभाते हैं। मर्चेंट नेवी और भारतीय नाविकों जैसे विषय पर प्रखर वक्ता के रूप में विभिन्न स्कूलों व कॉलेजों में उपस्थिति दर्ज करवाते हैं।
