बिलासपुर, सुभाष-:हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के बिलासपुर डिपो में इलेक्ट्रिक बस का ट्रायल पूरी तरह सफल रहा है। दो दिनों तक विभिन्न पहाड़ी और मैदानी रूटों पर किए गए इस परीक्षण में बस की पावर, माइलेज और समग्र परफॉर्मेंस संतोषजनक पाई गई। ट्रायल के नतीजों से यह स्पष्ट हुआ है कि इलेक्ट्रिक बसें प्रदेश के दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए भी उपयुक्त साबित हो सकती हैं।
एचआरटीसी के डिप्टी डीएम विवेक लखनपाल ने जानकारी देते हुए बताया कि पहले दिन इलेक्ट्रिक बस को बिलासपुर एम्स से हमीरपुर तक चलाया गया, जबकि दूसरे दिन बस का संचालन बिलासपुर से स्वारघाट होते हुए गुरु का लाहौर तक किया गया और वापसी भी इसी रूट से हुई। दोनों दिनों में बस को 65 यात्रियों के साथ चलाया गया, जिससे वास्तविक परिस्थितियों में इसकी क्षमता और प्रदर्शन का आकलन किया जा सके।ट्रायल के दौरान यह पाया गया कि बस की पावर पहाड़ी चढ़ाई पर भी प्रभावशाली रही और ओवरलोडिंग क्षमता निर्धारित मानकों से लगभग दोगुनी रही। इससे भविष्य में इन बसों के नियमित संचालन की संभावनाएं और अधिक मजबूत हो गई हैं। हालांकि, सभी तकनीकी आंकड़ों और डाटा का गहन विश्लेषण करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
चार्जिंग सुविधाओं को लेकर भी तैयारियां तेज कर दी गई हैं। विवेक लखनपाल ने बताया कि बिलासपुर वर्कशॉप में एक चार्जर स्थापित किया गया है, जिससे एक साथ दो इलेक्ट्रिक बसों को चार्ज किया जा सकता है। जल्द ही एक अतिरिक्त चार्जर लगाया जाएगा, जिससे चार बसों को एक साथ चार्ज करने की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके अलावा बिलासपुर बस स्टैंड पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। मंडी-भराड़ी में प्रस्तावित नए बस स्टैंड में भी चार्जिंग सुविधा दी जाएगी, जबकि घुमारवीं में दो चार्जर लगाए जाएंगे।
सुरक्षा मानकों के अनुसार बस की बैटरी को 20 प्रतिशत से नीचे नहीं जाने दिया जाता। ट्रायल के दौरान यह भी सामने आया कि बस को पूर्ण रूप से चार्ज करने में लगभग 90 से 95 मिनट का समय लगता है।उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से जहां पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, वहीं ईंधन खर्च में कमी आने से निगम को आर्थिक लाभ भी होगा। आने वाले समय में प्रदेश के अन्य रूटों पर भी इलेक्ट्रिक बसों का संचालन बढ़ाए जाने की योजना है।
