सोलन/योगेश शर्मा: हिमाचल में टैक्सी चालक जीपीएस के कारण बेहद परेशानी में हैं। क्योंकि सरकार ने 13 कंपनियों को ही जीपीएस लगाने के लिए अधिकृत किया है। लेकिन यह कंपनियां टैक्सी चालकों से मनमाने रेट वसूल रही है। जिसके चलते ज्यादातर टैक्सियां घाटे पर चल रही है। अगर कोई चालक जीपीएस नहीं लगाता है तो उसे टैक्सी चलाने की अनुमति नहीं दी जाती है। देवभूमि टैक्सी यूनियन सोलन समय-समय पर अपना विरोध इस जीपीएस व्यवस्था के लिए दर्ज कर चुकी है लेकिन यह व्यवस्था जस की तस बनी हुई है। यूनियन के अध्यक्ष अशोक चौहान ने कहा कि उन्हें विभाग द्वारा जल्द राहत दी जानी चाहिए। जो लूट जीपीएस के नाम पर कंपनियां कर रही है उन पर रोक लगानी चाहिए।
देवभूमि टैक्सी यूनियन का ये कहना
देवभूमि टैक्सी यूनियन सोलन के अध्यक्ष अशोक चौहान ने कहा कि जो जीपीएस बाज़ार में दो से तीन हजार रुपए में मिल जाता है, वह पहले करीबन 18 हज़ार रूपये में जबरन लगवाया गया। अभी भी यह जीपीएस सिस्टम करीबन 7 से 8 हज़ार रुपए में अधिकृत कंपनियां लगा रही है। उन्होंने कहा कि अगर यह सुविधा बाज़ार में 3 हज़ार रुपए में मिल रही है लेकिन विभाग द्वारा अधिकृत कंपनियों से ही जीपीएस लगाने के लिए उन्हें बाध्य किया जा रहा है। जिसकी वजह से उन्हें करीबन 8 हज़ार रुपए खर्च करने पड़ रहे है। वहीं अलग अलग कंपनियां मनचाहे रेटों पर जीपीएस लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कम्पनी ने कंपनियों को अधिकृत किया है तो उनका रेट भी एक होना चाहिए था। लेकिन उनके मूल्यों में बेहद असमानता है जो बेहद गलत है। वह चाहते है जो भी यह अनियमितताएं है उन्हें दूर किया जाना चाहिए।
