शिमला , संजू -: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में पुलिस का एक अनोखा और मानवीय चेहरा देखने को मिला, जिसने आम धारणाओं को बदलकर रख दिया। कड़क वर्दी और अनुशासन के लिए पहचाने जाने वाले पुलिस जवानों ने इस बार अपने हाथों में डंडे की जगह ब्रश थामकर कला के जरिए समाज को संदेश दिया। ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में आयोजित चित्रकला प्रदर्शनी ने हर किसी को प्रभावित किया।
इस विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन सुरेंद्र चौहान ने किया, जबकि कार्यक्रम में अशोक तिवारी भी मौजूद रहे। प्रदर्शनी में पुलिस कर्मियों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स ने यह साबित किया कि वे न केवल कानून के रक्षक हैं, बल्कि संवेदनशील और रचनात्मक सोच भी रखते हैं।महापौर सुरेंद्र चौहान ने पुलिस जवानों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल बेहद सराहनीय है और समाज के सामने पुलिस का एक सकारात्मक पक्ष प्रस्तुत करती है। उन्होंने खास तौर पर उन पेंटिंग्स का जिक्र किया, जिनमें ‘चिट्टा’ जैसे नशे के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया गया था। इसके अलावा हिमाचली संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों को भी कलाकारों ने खूबसूरती से उकेरा।उन्होंने घोषणा की कि भविष्य में ‘शिमला हाट’ में इन पुलिस कलाकारों को विशेष स्थान दिया जाएगा, ताकि उनकी प्रतिभा को स्थायी मंच मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि इस पहल के पीछे अशोक तिवारी की दूरदर्शी सोच है, जिन्होंने पुलिस नेतृत्व की नई मिसाल पेश की है।
इस मौके पर DGP अशोक तिवारी ने कहा कि पुलिस को केवल सख्ती के प्रतीक के रूप में देखना अधूरा नजरिया है। उन्होंने बताया कि विभाग पिछले कुछ समय से उन जवानों को प्रोत्साहित कर रहा है, जो पेंटिंग, हस्तशिल्प और अन्य कलाओं में रुचि रखते हैं।उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि पुलिस कर्मी अपनी कला को व्यावसायिक रूप देना चाहते हैं, तो विभाग इस दिशा में भी सकारात्मक कदम उठाने को तैयार है। यह प्रदर्शनी न केवल कला का प्रदर्शन थी, बल्कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास और जुड़ाव को मजबूत करने की एक सार्थक पहल भी साबित हुई।
Chandrika
