मंडी/परी शर्मा: ओशो वर्ल्ड पत्रिका के संपादक स्वामी चैतन्य कीर्ति ने आज मंडी में पत्रकार वार्ता कर ओशों के मूल संदेश को प्रेषित किया। स्वामी चैतन्य कीर्ति ओशो की दृष्टि पर 5 पुस्तकों का लेखक कर चुके है। वो 1971 से ओशो से जुड़े तब से लेकर अब तक वह विभिन्न प्रातों में जाकर ओशो की अंतर्दृष्टि, के बारे में जानकारी दे रहे है। स्वामी चैतन्य कीर्ति ने कहा कि जब तक व्यक्ति ध्यान नही करता तब तक उसे आनंद नही मिलेगा। उन्होंने जानकारी दी की 11 दिसंबर, 1931 को मध्य प्रदेश के कुचवाड़ा में ओशो का जन्म हुआ था। जन्म के वक्त उनका नाम चंद्रमोहन जैन था।
बचपन से ही उन्हें दर्शन में रुचि पैदा हो गई। उन्होंने अलग-अलग धर्म और विचारधारा पर देश भर में प्रवचन देना शुरू किया। शुरुआती दौर में उन्हें आचार्य रजनीश के तौर पर जाना जाता था। नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने नवसंन्यास आंदोलन की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने खुद को ओशो कहना शुरू कर दिया। भारत लौटने के बाद वे पुणे के कोरेगांव पार्क इलाके में स्थित अपने आश्रम में लौट आए। उनकी मृत्यु 19 जनवरी, 1990 में हो गई। उन्होने बताया कि वे विभिन्न प्रातों में जाकर ओशो की अंतर्दृष्टि, के बारे में जानकारी दे रहे है। ओशो वर्ल्ड पत्रिका के संपादक स्वामी चैतन्य कीर्ति ने ओशो की दृष्टि पर 5 पुस्तकों का लेखक कर चुके है।
