कांगड़ा (एकता): भाजपा के वरिष्ठ विधायक विपिन सिंह परमार हिमाचल प्रदेश के बड़े राजनीतिक चेहरों में से एक हैं। उन्होंने अपने जीवन में काफी नाम कमाया। इतना ही नहीं वह तीसरी बार विधानसभा के 17वें अध्यक्ष के रूप में चुने गए। विपिन सिंह परमार की और भी खास बातें हैं जिन्हें हम आपको बताएंगे। आइए जानिए परमार के राजनीतिक जीवन का परिचय।
पालमपुर तहसील के ननाओ गांव में हुआ विपिन परमार का जन्म
विपिन परमार का जन्म 15 मार्च 1964 को कांगड़ा जिला की पालमपुर तहसील के ननाओ गांव में हुआ। वह पहली बार 1998 में हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए थे और बाद में 2007 और 2017 में फिर से चुने गए। दिसंबर 2017 से फरवरी 2020 तक उन्होंने जयराम ठाकुर मंत्रालय में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री के रूप में कई काम किए। वर्तमान सरकार में वह स्वास्थ्य मंत्री थे। वह विद्यार्थी जीवन में एबीवीपी में सक्रिय रहे और संगठन मंत्री रह चुके हैं।

विधानसभा चुनाव में हासिल की थी जीत
विधानसभा चुनाव 2017 में भाजपा के उम्मीदवार विपिन सिंह परमार ने कांग्रेस के प्रत्याशी जगजीवन पॉल को 10291 मतों के अंतर से हराया था। उनके पिता का नाम कंचन सिंह परमार है। उन्होंने ग्रेजुएशन में बीए और एलएलबी भी किया है। विपिन ने अपने कॉलेज के दिनों में ही ABVP का दामन थामा था। वे 1980 में हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ अध्यक्ष भी रहे हैं। वह 8 साल से हिमाचल प्रदेश एबीवीपी के आयोजक सचिव रहे हैं। वह दो बार राज्य बीजेपी के जनरल सेक्रेटरी भी रहे हैं।

