भावना शर्मा: हिमाचल प्रदेश में वैसे तो होली का त्यौहार बड़ी ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं, लेकिन जिला हमीरपुर के सुजानपुर टिहरा में इस होली महोत्सव की कुछ अलग ही धूम रहती हहैं। यहां होली पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है और सभी लोग सुजानपुर के होली मैदान में आकर होली खेलते हैं। यहां इस होली पर्व को मनाने की परंपरा नई नहीं हैं। यहां होली उत्सव का इतिहास 300 साल पुराना हैं।
यह हैं सुजनापुर होली उत्सव से जुड़ा इतिहास
सुजानपुर टिहरा में होली उत्सव कि शुरुवात का श्रेय कटोच वंश के महाराजा संसार चंद को जाता है जिन्होंने पहली बार वर्ष1796 ई में हमीरपुर के सुजानपुर के चौगान मैदान में प्रजा के साथ होली खेली थी। उस समय राज महल में ही खास तरह का गुलाल होली के लिए तैयार किया गया था और पहली बार सुजानपुर नगर में होली मनाई गई थी। बताया जाता है कि उस समय भी सुजानपुर के मैदान के एक छोर पर स्थित मुरली मनोहर मंदिर से ही राजा ने होली का आगाज किया था और तब से लेकर आज तक इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा हैं। कटोच वंश वंशज आज भी इस होली उत्सव की परंपरा से जुड़े हैं और आज भी इस मंदिर से भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी को गुलाल लगाकर ही सुजानपुर चौगान मैदान में राष्ट्रीय स्तरीय होली उत्सव का आगाज किया जाता हैं।
तालाब में तैयार किया जाता था होली के लिए विशेष गुलाल
राजा संसार चंद की ओर से जब सुजानपुर में पहली बार होली खेली गई तो इसके लिए टिहरा स्थित बारादारी के आंगन में एक तालाब का निर्माण किया गया, जिसे पानी और कई तरह के सुगंधित द्रव्य और रंगों से भरा जाता था फिर होली के लिए गुलाल तैयार किया जाता था। यहां राजा पहले अपने परिवार के सदस्यों के साथ होली खेलते थे और उसके बाद ऐतिहासिक चौगान मैदान सुजानपुर में आकर अपनी प्रजा के साथ होली खेलते थे।
अब बड़े उत्सव ओर मेले का रूप ले चुकी हैं सुजनापुर कि होली
सुजानपुर के ऐतिहासिक चौगान मैदान है जिससे होली मैदान के नाम से भी जाना जाता हैं में आज भी यह होली उत्सव बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता हैं। अब इस होली उत्सव का स्वरूप बदल चुका है और इससे राष्ट्रीय स्तर के होली उत्सव का दर्जा भी दिया गया है ऐसे में इस होली उत्सव को बड़े स्तर पर यहां मनाया जाता हैं। कई तरह के आयोजनों के साथ ही यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है जिसमें कभी बड़े गायक और बैंड अपनी प्रस्तुतियां देने के लिए पहुंचते हैं।
आज भी मुरली मनोहर के मंदिर से होती है इससे होली उत्सव की शुरुआत
बताया जाता है कि महाराजा संसार चंद बेहद कला प्रेमी थे। पुणे कला से इतना प्रेम था कि उन्होंने कई तरह के मंदिरों का निर्माण अपनी रियासत में करवाया था वही उन्होंने 1794 में मुरली मनोहर मंदिर सुजानपुर का निर्माण कार्य भी शुरू किया था यह निर्माण कार्य 1796 में पूरा हुआ जिसके पूरा होने पर संसार चंद ने भव्य होली महोत्सव का आयोजन करवाया था। आज भी जब हमीरपुर के चौगान मैदान में राष्ट्रीय स्तरीय होली उत्सव का आगाज किया जाता हैं, तो इसकी शुरुआत मुरली मनोहर मंदिर से ही की जाती हैं। यहां मंदिर में 50 फीट ऊंचा झंडा चढ़ाने के साथ ही भगवान कृष्ण के मुख पर गुलाल लगाकर होली मेले का आगाज किया जाता हैं।
चौगान में राजा की सेनाएं करती थी अभ्यास
सुजानपुर टिहरा का चौगान मैदान जहां होली उत्सव मनाया जाता हैं वहां कटोच वंश वंश के राजाओं की सेना अभ्यास किया करती थी। वहीं होली के दिन राजा संसार चंद यहां चौगान मैदान में आकर अपनी प्रजा के साथ होली खेलते थे। राजा का अपनी प्रजा से असीमा प्रेम था यही वजह थी कि अपनी प्रजा के साथ घुलने मिलने और उनसे स्नेह के चलते ही उन्होंने इस होली पर्व की शुरुआत सुजानपुर में की थी।
