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Reading: बबूने के फूलों और तुलसी की हर्बल खेती कर पद्धर पंचायत की महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की लिख डाली सुनहरी कहानी
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बबूने के फूलों और तुलसी की हर्बल खेती कर पद्धर पंचायत की महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की लिख डाली सुनहरी कहानी

admin
admin 7 Min Read
Updated 2023/02/06 at 12:50 PM
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भावना शर्मा: अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो और आप खुद को आत्मनिर्भर करना चाहते हो तो जरूरी नहीं है कि आप अपने घरों से बाहर निकल कर ही कुछ काम करें। आप अपने घर पर रहकर अपनी जमीन से जुड़ कर भी कुछ ऐसा काम कर सकते हैं जिसके बलबूते पर आप आत्मनिर्भर बन सके। ऐसा ही कुछ करिश्मा कर दिखाया है कांगड़ा जिले की पद्धत पंचायत की महिलाओं ने जो यहां बबून के फूल और काली तुलसी की खेती कर आत्मनिर्भर होने की दिशा में अग्रसर होती जा रही हैं। इन महिलाओं की मेहनत ही है कि आज इस पंचायत की फिजाओं में भी काली तुलसी और बबूने के फूलों की महक तैरती हुई नजर आती हैं।
धर्मशाला की ग्राम पंचायत पद्धर के पद्धर और घिरथोली गांवों की इन महिलाओं ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में स्वयं सहायता समूह बनाकर बबूने के फूल और काली तुलसी की हर्बल खेती से रोज़गार का नायाब ज़रिया ढूंढ निकाला हैं, जिसकी मदद से वह घर के कामों को करने के साथ ही परिवार की आर्थिक रूप से भी सहायता कर रही हैं। महिलाएं अपने घरों का काम निपटा कर अपने खेतों में चली जाती हैं और यहां कैमोमाइल और काली तुलसी की खेती करने के साथ ही उसकी देखरेख का कार्य भी करती हैं।
इस खेती को महिलाएं यहां वैष्णों  स्वयं सहायता समूह की मदद से कर रही हैं। बाकायदा इसके लिए प्रशिक्षण भी महिलाओं को धर्मशाला के खंड विकास अधिकारी कार्यालय में आयोजित शविर के दौरान है दिया गया था वहीं से महिलाएं इस खेती को करने के लिए प्रेरित हुई हैं। खेती के लिए विभाग से बीज फ्री मिल गए और ट्रेनिंग का प्रबंध भी जिला प्रशासन ने ही किया। जोगिंदरनगर और सोलन में लगे प्रशिक्षण कैंप में जाकर हर्बल खेती की बारकियां सीखीं और फिर आकर इसमें जुट गईं हैं।
पद्धर के वैष्णो स्वयं सहायता समूह की सदस्य सुदर्शना देवी, आशा देवी ओर आकांक्षा स्वयं सहायता समूह की लक्ष्मी, मितांश स्वयं सहायता समूह की पूजा और कमला स्वयं सहायता समूह की कमला देवी बताती हैं कि हर्बल खेती में अच्छी संभावनाएं देखते हुए पद्धर पंचायत में और भी बहुत सी महिलाएं स्वयं सहायता समूह बनाकर इस काम में हाथ आजमाने को आगे आ रही हैं। हर समूह में 6 से 10 महिलाएं हैं, और सभी अपने अपने खेतों में इस खेती को कर रही हैं।
सुदर्शना देवी, आशा देवी का कहना हैं कि बबूने के फूलों और काली तुलसी की हर्बल खेती से उनका इतना ज्यादा फायदा पहुंचेगा इसके बारे में उन्होंने नहीं सोचा था लेकिन अब वह बबूने के फूलों से ही तकरीबन 13 से 15 हजार की आमदनी कमा चुकी हैं। फसल को बेचने के लिए भी उन्हें ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ता और प्रागपुर के एक बड़े ग्रुप में ही उन्होंने अपनी फसल उचित दामों पर बेची हैं। इसके साथ ही अपने खेतों में काम करने पर भी उन्हें मनरेगा की दिहाड़ी मिल रही हैं। महिलाओं का कहना है कि प्रशासन की ओर से उन्हें मार्केट उपलब्ध करवाने को लेकर मदद की जाती है वही बीच-बीच में अधिकारी आकर उनकी फसलों का निरीक्षण भी करते हैं और उनकी हौसला अफजाई करते हैं जिससे महिलाएं इस कार्य को करने के लिए प्रेरित हो रही हैं।
धर्मशाला ब्लॉक में महिलाओं के लिए सामाजिक शिक्षा आयोजक का जिम्मा देख रहीं बीडीओ ऑफिस की अधिकारी कुसुम ने बताया कि है महिलाओं को उनकी रूचि के अनुरूप स्वरोगजार की शिक्षा देने पर बल दिया जा रहा हैं। इसके तहत महिलाएं अपने घरों में रहकर भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। वहीं जिलाधीश कांगड़ा डॉ. निपुण जिंदल का कहना है कि प्रदेश सरकार के निर्देशों के अनुरूप जिला प्रशासन का प्रयास है कि स्वयं सहायता समूहों के गठन के साथ ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार की ओर मोड़ा जाए। महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में ये प्रयास कारगर रहे हैं। जिले की बहुत सी पंचायतों में महिलाओं ने सराहनीय काम किया है। उनके प्रोत्साहन को हर तरह से मदद के साथ साथ उनकी उपज और उत्पादों के लिए मार्केट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई हैं।
ना खाद, ना कीटनाशक का होता हैं प्रयोग, जंगली जानवर भी नहीं पहुंचाते नुकसान
इस बबूने के फूलों और काली तुलसी की खेती की खास बात यह हैं कि यह खेती पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से की जा रही हैं । इसमें केमिकल मिली खाद का प्रयोग नहीं किया जाता। कीड़ा लगने पर खट्टी छाछ का छिड़काव या प्राकृतिक तरीके के और उपचार किए जाते हैं। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि जंगली जानवर भी इस फसल को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। महिलाओं ने आमदनी अच्छी मिले इसके लिए बबूने के फूल और काली तुलसी के साथ कुछ पौधे अश्वगंधा, जटामासी ओर चिया सीड के भी लगाए हैं। उनकी भी बाजार में अच्छी खासी डिमांड है।
यहां होता हैं  बबूने के फूल और काली तुलसी का इस्तेमाल यह हैं फायदे
बबूने के फूल और काली तुलसी के स्वास्थ्य के लिए अनेक फायदे हैं। इन्हें ग्रीन टी बनाने में उपयोग में लाया जाता है, जो अनिद्रा, पेट और लीवर की दिक्कतों तथा बीपी और शूगर जैसे विकारों को नियंत्रित करने में रामबाण हैं। इसके अलावा इनका सौंदर्य प्रसाधनों में भी इस्तेमाल होता हैं। वहीं चिया सीड भी पाचन, तनाव और उच्च रक्तचाप को दुरूस्त रखने में मददगार हैं।
TAGGED: basil, chamomile, golden story, herbal cultivation, Padhar Panchayat, Women
admin February 6, 2023
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