By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Summer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - HimachalSummer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - Himachal
Aa
  • Home
  • Himachal
  • Political
  • Health
  • Education
Reading: शिमला रेलवे स्टेशन पर मौजूद हैं एक ऐसी टनल जिससे भेजी जाती हैं डाक तो पहुंच जाती हैं प्लेटफॉर्म पर
Share
Summer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - HimachalSummer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - Himachal
Aa
  • Home
  • Himachal
  • Political
  • Health
  • Education
Search
  • Home
  • Himachal
  • Political
  • Health
  • Education
  • Home
  • Himachal
  • Political
  • Health
  • Education
© 2022 Dawn News Network Pvt Ltd. | News Media Company | All Rights Reserved.
Summer News Himachal | No.1 Web Channel in Shimla - Kasol - Himachal > Blog > himachal > शिमला रेलवे स्टेशन पर मौजूद हैं एक ऐसी टनल जिससे भेजी जाती हैं डाक तो पहुंच जाती हैं प्लेटफॉर्म पर
himachalNews

शिमला रेलवे स्टेशन पर मौजूद हैं एक ऐसी टनल जिससे भेजी जाती हैं डाक तो पहुंच जाती हैं प्लेटफॉर्म पर

admin
admin 5 Min Read
Updated 2023/02/21 at 6:25 PM
Share
भावना शर्मा: राजधानी शिमला को अंग्रेजों ने बसाया तो इस शहर में क़ई टनलों का निर्माण भी अंग्रेजों ने करवाया। शिमला शहर में विक्ट्री टनल,रिवोली टनल, ढली टनल के साथ ही एक टनल ऐसी भी हैं जिसका इस्तेमाल डाक भेजने के लिए किया जाता हैं। यह टनल शिमला के रेलवे स्टेशन पर स्थित हैं और इस टनल को डाक थैला सुरंग के नाम से जाना जाता हैं। इस टनल की ख़ास बात यह हैं कि इसका निर्माण तो भले ही अंग्रेजों ने अपनी सहूलियत के लिए करवाया था लेकिन आज भी इस टनल का इस्तेमाल रेलवे डाक विभाग की ओर से किया जा रहा हैं।
रेलवे के डाक विभाग की ओर से इस टनल का इस्तेमाल डाक के भारी भरकम थैलों को रेलवे प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने में किया जाता हैं। इस सुरंग से डाक कार्यालय से डाक के थैले सुरंग में डाले जाते है जो प्लेटफॉर्म पर पहुंच जाते हैं। इसके बाद इन डाक थैलों को कालका मेल ट्रेन के माध्यम से आगे भेजा जाता हैं।
बता दें कि अंग्रेजों की ओर से बनाई गई ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला में डाक ब्रिटिशकालीन समय में घोड़ो ओर लाई ओर ले जाई जाती थी। समय बदला ओर अंग्रेजों ने वर्ष 1903 में यहां रेल पहुंचाई। कालका शिमला रेल लाइन यहां पहुंचने के बाद डाक को लाने और ले जाने का तरीका भी बदल गया। अब तक जो डाक घोड़ों के माध्यम से शिमला लाई ओर ले जाई जाती थी उसे रेल के माध्यम से लाया और ले जाया जाने लगा। उस समय डाक को शिमला रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म तक पहुंचाने के लिए अंग्रेजों ने अपने दिमाग का इस्तेमाल कर यहां एक डाक थैला सुरंग का निर्माण करवाया। आज वर्षों बाद भी रेलवे डाक विभाग उस सुरंग का इस्तेमाल अपने काम को आसान बनाने के लिए कर रहा हैं।
मैन पॉवर का इस्तेमाल कम हो इसके लिए किया गया 
सुरंग का इस्तेमाल
ब्रिटिशकालीन समय में अंग्रेजों का इस सुरंग को बनाने के पीछे का उद्देश्य मैन पॉवर के इस्तेमाल को घटाना था। अगर अंग्रेज इस डाक थैला सुरंग का निर्माण नहीं करते तो प्लेटफार्म तक डाक पहुंचाने के लिए 4 से 5 कर्मचारियों की आवश्यकता होती। उन्हें कंधों पर यह भारी-भरकम थैले उठाकर प्लेटफार्म तक पहुंचाने पड़ते। इससे जहां समय की बर्बादी होती तो वहीं अधिक मैन पॉवर का इस्तेमाल भी रेलवे डाक विभाग को करना पड़ता। ऐसे में इस काम को आसान बनाने के लिए अंग्रेजों ने इस अंडरग्राउंड डाक थैला सुरंग का निर्माण करवाया। उनकी इसी सोच और अद्भुत वास्तुकला ने आज भी रेलवे डाक विभाग के काम को आसान बनाया हुआ हैं।
डाक थैला सुंरग इस तरह भेजी जाती हैं डाक
रोजाना रेलवे डाक विभाग रेलवे गेट के पास मुख्य सड़क पर बने कार्यालय में सैकड़ों डाक के थैले पहुंचते हैं। इसमें सामान्य डाक के साथ ही भारी भरकम कुरियर भी शामिल होते हैं। इन थैलों को डाक कर्मी रेलवे डाक कार्यालय तक पहुंचाते है जिसके बाद डाक थैला सुरंग से इन थैलों को शिमला प्लेटफॉर्म पर पंहुचाया जाता हैं जिससे आसानी से इन डाक थैलों को कालका मेल में डाल कर भेजा जाता हैं। इसके बाद कालका शिमला रेलवे ट्रेक पर चलने वाली कालका मेल ट्रैन  में शाम 6 बजे यह डाक के थैले भेजे जाते हैं। रोजाना 100 से अधिक थैले इस सुरंग से डाल कर प्लेटफॉर्म पर पहुंचाए जाते हैं।
अभियांत्रिकी का अद्भुत नमूना हैं डाक थैला सुरंग
रेल डाक थैला सुरंग का निर्माण अंग्रेजों ने सन 1920 में किया था। इस सुरंग की लंबाई 16.00 मीटर चौड़ाई 0.68 मीटर ओर ऊंचाई 0.8 मीटर हैं। इसके फर्श पर मृदु इस्पात की चादर बिछाई गई है और किनारों पर पत्थरों की दीवार की चिनाई की गई हैं। यह सुरंग अभियांत्रिकी का अद्भुत नमूना हैं। इसके छत पर लकड़ी का कार्य किया गया हैं और यह आज भी सुचारु रूप से प्रयोग में लाई जा रही हैं।अंग्रेजों ने इस सुरंग का निर्माण रेल डाक भवन से रेलवे प्लेटफॉर्म तक डाक पहुंचाने के लिए किया था, जिससे डाक कर्मचारियों का कार्य करने में काफी सहायता मिलती हैं।
TAGGED: mail, platform, post office, railway station, Shimla, tunnel
admin February 21, 2023
Share this Article
Facebook TwitterEmail Print
Previous Article जिला शिमला का हाटु मन्दिर पौराणिक काल से जुड़ा, जानिए क्या है विशेषता
Next Article प्रदेश भाजपा ने नए विवाद को दिया जन्म, साबरी ब्रदर्स के गाने का किया राजनीतिकरण
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Browse by Category
  • Accident
  • Business /Employement
  • crime
  • education
  • election
  • festival
  • health
  • himachal
  • News
  • political
  • political
  • Religion
  • Sports
  • Uncategorized
  • weather
  • शख़्सियत

You Might Also Like

नारी सम्मान पर राजनीति तेज, महिला आरक्षण विधेयक पर सांसद का विपक्ष पर निशाना

Ago

चुराह में सड़कों की हालत सुधरेगी, 8 किलोमीटर सड़क पर होगा टारकोल कार्य

Ago

प्रसाद योजना से बदलेगा चिंतपूर्णी मंदिर का स्वरूप, डिप्टी सीएम ने की प्रगति की समीक्षा

Ago

धर्मशाला में टैक्सी ऑपरेटरों का विरोध तेज, हनुमान मंदिर में की प्रार्थना; 22 अप्रैल की बैठक पर टिकी

Ago

1058, Mall Enclave, DAYAL NAGAR,
Ludhiana, Punjab 141001

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?