कुल्लू/मनमिन्द्र अरोड़ा: एशिया पैसिफिक मूवमेंट ऑन डेट एंड डेवलपमेंट द्वारा समर्थित पीपल फॉर हिमालयन डेवलपमेंट समन्वित एक साइकिलिंग कार्यक्रम में कुल्लू, हिमाचल प्रदेश में आयोजित किया गया। जिसमें 50 से अधिक साइकिल चालकों और स्वयंसेवकों ने साइकिल चलाई और लोगों को जलवायु न्याय, स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु वित्त पर जागरूक किया।

पेडल फॉर पीपल एंड प्लैनेट के बैनर तले ये आयोजन किया गया। पीपल फॉर हिमालयन डेवलपमेंट से अदिति चंचलानी ने कहा कि हम जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली चरम मौसमी आपदाओं के विनाशकारी प्रभावों से पीड़ित हैं। बार-बार और तेज होते मौसम और जलवायु की घटनाएं और प्राकृतिक खतरे कई विकासशील देशों और हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित कर रहे हैं, जो हमारे घरों, भूमि, आजीविका, अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट कर रहे हैं। वही चंबा जिले के पांगी उपमंडल में चंद्रभागा नदी पर प्रस्तावित मेगा जलविद्युत परियोजना के खिलाफ लड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. प्रेमदीप लाल ने ऊर्जा और बिजली बनाने के लिए जीवाश्म ईंधन-कोयला, गैस और तेल के निरंतर जलने पर बात की और कहा कि इसके परिणामस्वरूप जलवायु परिवर्तन होता है। ग्रीन हाउस गैसों को वातावरण में छोड़ा जाता है जब जीवाश्म ईंधन जला दिया जाता है। गर्मी में फंस जाता है और ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनता है।

पीपल फॉर हिमालयन डेवलपमेंट के मैनेजिंग ट्रस्टी संदीप मिन्हास ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव पहले से ही देश में लोगों के जीवन को तबाह कर रहा है। आने वाले दशकों में और भी बदतर हो जाएगा। यह सरकारों, निगमों और समुदायों के लिए जीवाश्म ईंधन के उपयोग को समाप्त करने, वास्तविक समाधानों को लागू करने और ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए अन्य उपायों जैसी दीर्घकालिक कार्रवाई करने का समय है। जलवायु वित्त विकासशील देशों के लिए बड़े उत्सर्जक का दायित्व और ऋण दोनों है।
