मंडी : धर्मवीर – हिमाचल के जंगलों में अनेक प्राकृतिक फल पाए जाते हैं जो हमें स्वाद के साथ-साथ औषधीय गुणों का भी लाभ देते हैं। इन फलों के पकने का समय भी अलग अलग होता है। हिमाचल के मंडी जिला में मई के महीने में जंगलों में ऐसा फल पककर तैयार होता है जिसका नाम काफल है।
मधुमेह, हृदयचाप व पेट की बीमारियों को दूर करता है “काफल”
मधुमेह, हृदयचाप व पेट की कई बीमारियों को दूर करने में लाभकारी जंगली फल काफल मंडी शहर में पहुंचना शुरू हो गया है। हालांकि पिछले सालों की बात की जाए तो काफल अप्रैल माह के अंत में या मई महीने के पहले सप्ताह में मंडी शहर में पहुंच जाता था लेकिन इस बार मौसम ठंडा होने की वजह से काफल का फल देरी से पक कर तैयार हुआ है। जिस कारण काफल की कीमत इस साल पिछले साल की अपेक्षा ज्यादा भी है। इस साल मार्च व अप्रैल में बारिश होने से बाजार में काफल 15 से 20 दिन देरी से पहुंचा है ।
काफल के औषधीय गुणों के बारे में जानकारी देते हुए आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ ओम राज ने बताया कि काफल में कैल्शियम, जिंक, पोटैशियम सहित कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। जो शरीर के लिए बहुत ही लाभकारी होते है। उन्होंने बताया कि काफल पेट की जलन, गर्मी व डायरिया के लिए बहुत लाभकारी है। वहीं काफल गर्मी के दिनों में शरीर के इलेक्ट्रोलाइट को बनाए रखता है।
300 से 400 रुपये प्रति किलो बिक रहा
इस साल बाजार में काफल 300 से 400 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। काफल विक्रेताओं का कहना है कि वे हर वर्ष काफल लेकर शहरों में पहुंचते हैं। विक्रेताओं का कहना है कि 1 महीने तक काफल का सीजन चलता है और कहीं परिवारों की रोजी-रोटी इससे जुड़ी होती है। वहीं ग्राहक नवीन ने बताया कि काफल का फल खाने में बहुत ही स्वादिष्ट है और इसके कई औषधीय गुण भी है। उन्होंने पहली बार सीजन में काफल का फल चखा है। बाजार में अभी काफी कीमत अधिक है जैसे-जैसे अधिक मात्रा में काफल बाजार में पहुंचेगा इसकी कीमत में भी कमी आएगी। बता दें कि मंडी जिला के कटौला, गोहर, मोवीसेरी, तुंगलघाटी, चौहारघाटी व अन्य पहाड़ी क्षेत्रों के जंगलों में काफल की पैदावार होती है। मंडी जिला से हर वर्ष भारी मात्रा में प्रदेश के अन्य जिलों में काफल फल की खेप पहुंचती है।
