राहुल चावला, धर्मशाला: भारत के साथ-साथ मंगलवार को निर्वासित तिब्बतियन सरकार की ओर से भी ग्लोबल सिटी मैक्लोडगंज स्थित अपने संसद भवन परिसर में भारत की आज़ादी का 77वां दिवस बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान निर्वासित सरकार के सिक्योंग (राष्ट्रपति) पेम्पा त्सेरिंग ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की ओर तिरंगा फहराकर भारतीय राष्ट्रीय गान गाया।
त्सेरिंग ने कहा कि भारत और तिब्बत की एक ही ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्टभूमि हैं। आज भारत ब्रिटिश से आज़ाद होकर अपनी 76वीं वर्षगांठ बना रहा है तो वहीं तिब्बत आज भी अपने अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत हैं। ऐसे में तिब्बतियन लोग भारत और वैश्विक समुदाय से सहयोग की अपेक्षा करते हैं ताकि चीन के चंगुल से तिब्बत के अपने हक हकूक हासिल हो सकें। उन्होंने कहा कि भारत को ब्रिटिश से लंबे संघर्षों के बाद आज़ादी हासिल हुई है जो कि बेहद महत्वपूर्ण है और आज ठसक के साथ हर भारतीय उसे सेलिब्रेट भी करता हैं। मगर उसे कायम रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण हैं। ये हर देशवासी की जिम्मवारी हैं।
पेम्पा त्सेरिंग ने कहा कि आज दुनियाभर में अशांति का माहौल है और भगवान बुद्ध हमेशा से शांति और करुणा का पाठ पढ़ाते रहे हैं जिसका आज की तारीख़ में दुनिया के हर देश को करना बेहद अहम हैं। शांति के इस संदेश की जननी भारत रही है और आज भी भारतभूमि से ही परम पावन दलाईलामा दुनियाभर में बौद्ध के उस संदेश का अनुकरण करते हुए वैश्विक शांति को बढ़ावा दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चीन दुनिया को जो दिखता है वैसा है नहीं अंदर से वो खोखला हैं। इस ओर दुनिया को ध्यान देने की सख़्त जरूरत है, तिब्बत की स्वतंत्रता को लेकर त्सेरिंग ने कहा कि वो बेहद आशावान हैं अगर ऐसा न होता तो उनका आज दिन तक संघर्ष न हो रहा होता और अब तक तो ये मसला भी ख़त्म हो चुका होता।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया बदल रही है और चीन और चीन के नेताओं को भी बदलना होगा और उन्हें ये विश्वास है कि चीन एक दिन जरूर बदलेगा, क्योंकि आज देश दुनिया में जो चल रहा है वो नहीं बदला तो उससे किसी को कोई लाभ नहीं होगा चीन को भी नहीं। ऐसे में चीन के नेताओं को भी वो करना चाहिए जिसका उसे ख़ुद भी लाभ हो और दुनिया के बाकी देश भी लाभ उठाएं। इतना ही नहीं पेम्पा त्सेरिंग ने तो यहां तक भी कहा कि वो तो चाहते हैं कि चीन के नेताओं को कुछ कॉमन सेंस आए ताकि वो देश दुनिया की लाभकारी योजनाओं का भागीदार बन सकें।
