कुल्लू : मनमिंदर अरोड़ा ( TNS)- इजरायल और हमास के बीच चल रहे तनाव के चलते अब इसका बुरा असर जिला कुल्लू के पर्यटन पर भी पड़ रहा है। जिला कुल्लू की मणिकर्ण घाटी के विभिन्न इलाकों में इजरायल के लोग काफी संख्या में यहां रहते हैं और कसोल में भी उनकी खूब धूम रहती है। लेकिन हमास के द्वारा किए गए हमले के बाद अब इजरायल के निवासी वापस लौटना शुरू हो गए हैं। जिस मणिकर्ण घाटी के पर्यटन कारोबार पर बुरा असर हुआ है।
वहीं पर्यटन कारोबारी का कहना है कि इस ह+मले के बाद इजरायल में काफी तनावपूर्ण स्थिति हो गई है और अगले साल भी यह लोग शायद ही यहां पर वापिस आ पाए। पर्यटन कारोबारी का कहना है कि विदेशी सैलानी दिवाली तक मणिकर्ण घाटी के विभिन्न इलाकों में रहते थे। लेकिन अब वह वापस अपने अपने देश जा रहे हैं। जिला कुल्लू की पर्यटन नगरी मणिकर्ण के कसोल को मिनी इजरायल के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर 70 के दशक में इजरायल के लोगों का आना शुरू हुआ था और उसके बाद मणिकर्ण, कसोल, पुलगा तुलगा सहित अन्य इलाकों में यह काफी संख्या में हर साल घूमने के लिए आते हैं। ऐसे में गर्मियों में सीजन के दौरान विदेशी सैलानियों के तादाद इतनी अधिक होती है कि कसोल एक विदेश का कस्बा नजर आता है। इसीलिए इसे मिनी इजरायल के नाम से भी जाना जाता है। विदेशी नागरिकों का आवागमन अधिक होने के चलते यहां पर होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट सहित अन्य इलाकों में खूब बहार बनी रहती है और विदेशियों के लिए यहां पर विशेष रूप से पार्टियों का भी इंतजाम किया जाता है।
घर वापिस जाकर अपने लोगों की चाहते हैं मदद करना
इजरायल की रहने वाली शिरा ने बताया की वह बहुत समय बाद भारत में घूमने आई थी। लेकिन अब इस हालत में वह घर वापिस जाकर अपने लोगों की मदद करना चाहती है। इस वक्त पर वह आर्मी में नही है लेकिन स्वयं सेवा करके दूसरे तरीके से इन मुश्किल हालातों में लोगों की मदद करना चाहती है। शिरा ने कहा की हमास और इजरायल के बीच लंबे समय से ये हालत थे। लेकिन इस बार जो हुआ वह बेहद ही भयानक था। मुझे नहीं लगता था कि दुनिया में इस तरह की दरिंदगी भी होती है। लेकिन हमास के लोगों ने जो इजराइल में किया है वह बेहद ही घिनौना है। जब हमने पहले ये सारे वीडियो देखे तो हम हैरान थे, क्योंकि पहली ही बार हमें इस तरह के हालात देखे है। उसका कहना है कि इजराइल में चल रहे इस युद्ध के दौरान भारत के जो लोग मदद के लिए आगे आए है ये अच्छी बात है। लेकिन सबसे पहले दुनिया के बाकी देशों को भी इजराइल के हालात को समझना जरूरी है । इस वक्त इजराइल अपने लोगों को बचाने के लिए युद्ध कर रहा है न की किसी की जान लेने के लिए। मुझे नहीं मालूम की भारत से जाने वाले स्वयंसेवी किस तरह इजरायल की आर्मी की मदद करेंगे। लेकिन युद्ध की इस स्थिति में सेना के अलावा भी कई ऐसी चीजें है जिससे हम मदद कर सकते है।
इजरायल की केनेरियत ने बताया की उनकी आंटी इजराइल के दक्षिणी भाग में रहने है और इस गोलीबारी के दौरान उनके घर पर भी बम गिरे थे। लेकिन अच्छा हुआ को वह सब सुरक्षित है। उनका भाई आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहा है और उनके एक कजन को भी गोली लगी है जो की बुरी तरह से घायल होकर अब हॉस्पिटल में भर्ती है। उनके कई दोस्त भी इस युद्ध में लड़ाई लड़ रहे है । इजराइल में हालत बहुत डरावने है जिसे देख कर वह अभी घर वापिस जाने से डर रही है। वह अभी फैसला नहीं कर पा रही है की भारत में ही रुके या फिर अपने देश अपने परिवार के पास वापिस जाए। उन्होंने बताया की उनकी मां उन्हे घर बुला रही है, इस मुश्किल हालात में वो जितना अपने परिवार के पास रहना चाह रही है। वही पहली बार ऐसा हुआ है की वह घर वापिस जाने से डर रही है। यहां भारत में वह बहुत ज्यादा सुरक्षित महसूस कर रही है । यहां कसोल में रहते हुए उन्होंने देखा कि यहां के लोग उनकी मदद कर रहे है। इजरायल में हुए हमले के बाद सभी स्थानीय लोग उनके उनके परिवार का भी हाल जान दे है। उन्हे ये देख कर खुशी हुई की भारत के लोग इजराइल में हो रहे युद्ध को लेकर संवेदनशील है। इसी लिए हम सब भारत को प्यार करते है और भारतीय लोग भी हमे प्यार और सम्मान देते है। इसी लिए अभी वह यही रुक कर हालात ठीक होने का इंतजार करना चाहती है। बीते कई समय से वह भारत घूमने आने के लिए पैसे बचा रही थी, लेकिन अब जब वह यहां है तो उन्हे मालूम नहीं की इन हालातों में कैसे घूमने का आनंद ले। क्योंकि कहीं का कहीं उनका मन इजराइल लौट कर अपने परिवार के साथ रह देश की मदद करने का है। इस वक्त जब इजराइल जाने के लाए लोगों को कई सारे देशों से फ्लाइट बदल कर जाना पड़ रहा है। यह बेहद मुश्किल है। इस वक्त पर हम चाहते है की भारत सरकार हमारी मदद करे। ताकि लोगों को इस तरह से कई देशों से गुजर कर घर न लौटना पड़े।
स्थानीय कारोबारियों का ये कहना
कसोल में कैफे चलाने वाले देवराज ने बताया की इजरायल में युद्ध की ख़बर आने से बाद से आए दिन इजराइली नागरिक ग्रुप में वापिस लौटने लगे है। हर साल दिवाली तक कसोल में इजराइली पर्यटक मौजूद रहते थे। और यहां के लोगों का पर्यटन सीजन इन्ही लोगों पर निर्भर रहता है। अब बीते कुछ दिनों से सीजन खत्म होने से पहले ही कसोल से बाजार खाली होने लगे है। जिससे की स्थानीय लोगों के व्यापार पर भी असर देखने को मिलेगा। देवराज ने बताया की इजराइल के हालात को देखते हुए अब स्थानीय लोगों को ये चिंता भी सताने लगे है की मार्च में भी शायद कम संख्या में इजराइली पर्यटक वापस लौटेंगे। उनका कहना है की युद्ध की खबर आने के बाद से कसोल में रह रहे इजराइली नागरिकों में अपने देश की स्थिति को लेकर चिंता दिख रही है। मिनी इजरायल कहे जाने वाला कसोल हमेशा से ही इजराइली नागरिकों की पसंदीदा जगहों में से एक रहा है। और कसोल में कैफे, होम स्टे चलाने वाले ज्यादातर लोगों का व्यापार भी इन्ही पर्यटकों पर निर्भर रहता है।
