मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जो प्राकृतिक खेती से उत्पादित जैविक फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दे रहा है। मक्की पर दो बार एमएसपी बढ़ाई गई है—पहले 30 रुपये और फिर 40 रुपये प्रति किलोग्राम। गेहूं के लिए पहले 40 रुपये और अब 60 रुपये प्रति किलोग्राम की दर तय की गई है, जबकि कच्ची हल्दी पर 90 रुपये प्रति किलोग्राम का समर्थन मूल्य सुनिश्चित किया गया है।
राज्य सरकार द्वारा हिम-भोग हिम-मक्की ब्रांड नाम से प्राकृतिक मक्की का आटा सार्वजनिक वितरण प्रणाली और ‘हिम-ईरा’ पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध करवाया जा रहा है। अब तक लगभग 400 मीट्रिक टन मक्की की खरीद के लिए 1.20 करोड़ रुपये किसानों के बैंक खातों में सीधे स्थानांतरित किए गए हैं।सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में 9.61 लाख किसानों को चरणबद्ध रूप से प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाए। वर्तमान में 2,23,000 से अधिक किसान और बागवान प्रदेश की लगभग सभी पंचायतों में आंशिक या पूर्ण रूप से रसायन मुक्त खेती अपना चुके हैं।
ऊना जिले में 20 करोड़ रुपये की लागत से आलू प्रसंस्करण संयंत्र तथा हमीरपुर में मसालों के लिए स्पाइस पार्क की योजना भी इस दिशा में उठाए गए कदमों का हिस्सा हैं।मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के समय कई किसान कर्ज चुकाने के लिए अपनी जमीन बेचने को मजबूर थे। ऐसे किसानों को ब्याज अनुदान योजना के माध्यम से राहत दी गई है।
राज्य सरकार किसानों की आय में वृद्धि, गुणवत्ता वाले बीज, सिंचाई सुविधाओं का विकास, फसल बीमा, प्रशिक्षण और अनुसंधान को प्राथमिकता दे रही है। यह समग्र प्रयास राज्य को सतत कृषि विकास में अग्रणी बना रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण की रक्षा हो रही है बल्कि किसानों का भविष्य भी सुरक्षित हो रहा है।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार परंपरागत कृषि और आधुनिक बाजार के बीच की दूरी को कम करते हुए छोटे किसानों को भी सशक्त बना रही है, जिससे हिमाचल प्रदेश एक प्रेरणादायक उदाहरण उभर रहा है।
