संजु चौधरी, शिमला: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की ओर से घोषित यूजी प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम में 80 फीसदी छात्र इस परीक्षा में फेल हैं। परिणाम घोषित होने के बाद से ही छात्र इसका विरोध कर रहे है और लगातार धरना प्रदर्शन भी एचपीयू के कैंपस में हो रहा है। इस तनाव के माहौल के बीच शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में छात्रों ने एक कार्यक्रम में उपस्थित होने के लिए एचपीयू पहुंचे विश्वविद्यालय के कुलाधिपति राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को भी अपना ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से जहां छात्र संगठनों ने राज्यपाल को विश्वविद्यालय की ओर से घोषित परिणाम से छात्रों को हो रही परेशानी से अवगत करवाया है तो वहीं उनके समक्ष छात्रों की अन्य मांगें भी रखी हैं।
छात्र संगठनों का कहना है कि एचपीयू के ईआरपी सिस्टम से पेपर ऑनलाइन चेक किए गए हैं, जिससे 80 प्रतिशत छात्र फेल हो गए। उन्होंने राज्यपाल के समक्ष अपनी बात रखते हुए एचपीयू के ईआरपी सिस्टम में खामियां होने की बात कही। उन्होंने राज्यपाल के समक्ष अपनी मांग रखते हुए कहा है कि विश्वविद्यालय की ओर से छात्रों से रिचेकिंग करवाने की बात कही जा रही है, ऐसे में जो छात्र रिचेकिंग के बाद पास होते हैं उनकी रिचेकिंग की फीस विश्वविद्यालय की ओर से रिफंड की जानी चाहिए।
छात्रों का कहना हैं की विश्वविद्यालय में 6 से 7 हजार बच्चे पढ़ते हैं लेकिन केवल बारह सौ के करीब बच्चों के लिए ही हॉस्टल की सुविधा हैं। नेता विश्वविद्यालय में आकर पट्टीकाएं लगाकर चले जाते हैं लेकिन यह समस्याएं समाप्त नहीं हो रही हैं। छात्रों ने एचपीयू में हॉस्टलों की संख्या बढ़ाने के साथ ही छात्र संघ चुनाव बहाल किए जाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की हैं। छात्रों ने आरोप लगाया कि अध्यापक राजनीतिक गतिविधियों में पढ़ाई से ज्यादा शामिल रहते हैं जिससे विश्व विद्यालय में पढ़ाई का स्तर गिर रहा है, जबकि छात्रों से उनका लोकतांत्रिक अधिकार छीन लिया गया है और छात्र संगठन चुनाव नहीं करवाए जा रहे हैं।
