शिमला/कमल भारद्वाज: यूजी रिजल्ट में हुई धांधली को लेकर छात्र सड़कों पर उतर गए हैं। शिमला शहर के सभी कॉलेज और यूनिवर्सिटी के एसएफआई छात्रों ने ठेके पर पेपर चैकिंग का विरोध किया है। छात्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी शिक्षा का व्यापारी करण कर रही है। रिजल्ट, छात्र की सारी साल की मेहनत होती है , जिसे यूनिवर्सिटी ने आनन फानन में जारी कर दिया।
सीओई का कहना है कि जो छात्र अपने रिजल्ट से खुश नहीं है उन्हें यूनिवर्सिटी रिवैल्युएशन कराने का ऑप्शन दे रही है। सारी साल छात्र पढ़ाई पर पैसे खर्च करता है। उसके बाद अपने ही रिजल्ट के लिए पैसे देने पड़ते है। एसएफआई जिला अध्यक्ष अनिल ठाकुर ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में जिस तरह की लूट और बैकडोर एंट्री कराई जा रही है, उसका ही परिणाम है कि छात्रों को सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। सारी साल की मेहनत को जब ठेके पर दिया जाता है तो इसी तरह के नतीजे आ सकते हैं।
अब यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है छात्र आंसर शीट फिर से चैक करा सकता हैं। एक पेपर के 300 रुपए फीस रखी गई है। जो छात्र हर सब्जेक्ट में फेल है उसे घरवालों से पैसे मांगने पड़ेंगे। एसएफआई वाइस प्रेसिडेंट नेहा ठाकुर ने कहा कि छात्र संगठन लगातार ईआरपी सिस्टम में कमियों को दूर करने की मांग कई सालों से कर रहा है, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन को छात्रों के भविष्य से कोई लेना देना नहीं। रिजल्ट खराब आने की वजह से प्रदेश के हजारों छात्र मानसिक तनाव झेल रहें हैं। उसके लिए सिर्फ और सिर्फ एचपीयू जिम्मेदार है।
