अरविंदर सिंह,हमीरपुर: हमीरपुर शहर में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर समाधान तलाशने की याद अब नगर परिषद को आई है, जब इन आवारा कुत्तों ने यहां 3 साल की एक बच्ची को अपना शिकार बनाया। 3 साल की एक मासूम को नगर परिषद प्रशासन को जगाने के लिए अपनी जान गंवानी पड़ी जिसके बाद प्रशासन यहां हमीरपुर शहर में पालतू और आवारा कुत्तों की समस्या पर हरकत में आया है और इसे लेकर कुछ नए नियम भी तय किए जा रहे हैं। शहर में आवारा ओर पालतू कुत्तों से जुड़ी समस्याओं को लेकर एक विशेष बैठक का आयोजन चुनाव आचार सहिंता के बाद किया जाएगा।
इस बैठक में जहां शहर में पालतू कुत्तों को पालने के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया को करवाया जा अनिवार्य किया जाएगा। तो वहीं शहर में जो आवारा कुत्ते हैं उन्हें पकड़कर उनकी नसबंदी करने की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा की जाएगी। नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी अक्षित गुप्ता ने बताया कि शहर में आवारा कुत्तों की समस्या गंभीर होती जा रही है। यह आवारा कुत्ते बच्चों को अपना शिकार बना रहे हैं। इसी को देखते हुए नगर परिषद अब आचार संहिता समाप्त होने के बाद एक अहम बैठक इस मामले में करेगा। उन्होंने बताया कि 2012 तक हमीरपुर जिला में 8 पालतू कुत्तों का पंजीकरण हुआ है। उसके बाद लोगों की असक्रियता के चलते प्रक्रिया पूरी तरह से ठप्प पड़ी है।
अक्षित गुप्ता ने बताया कि नगर परिषद में विशेष बैठक का आयोजन कर दोबारा से कुत्तों के पंजीकरण को लेकर नियम बनाए जाएंगे और वार्षिक शुल्क सहित कुत्तों की टीकाकरण की भी विस्तृत जानकारी ली जाएगी। उन्होंने बताया कि आवारा कुत्तों की समस्या से निजात दिलवाने के लिए पशुपालन विभाग और नगर परिषद संयुक्त रूप से अभियान चलाएगा जिसमें कुत्तों को पकड़ने के अलावा उनकी नसबंदी भी की जाएगी। उन्होंने बताया कि नगर परिषद अधिनियम के तहत अगर कोई पालतू कुत्ते का पंजीकरण नहीं करवाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करने का प्रावधान भी किया जाएगा।
