चंद्रिका : कुल्लू का मलाणा गांव ऋषि जमलू के लिए जाना जाता है ।मलाणा गावं के आराध्य इष्ट देव जमदग्नि ऋषि जी (जमलू देवता) महाराज भगवान श्री विष्णु जी के छठवें अवतार भगवान परशुराम के पिता हैं।
बोर्ड के माध्यम से सैलानियों को किसी भी वस्तु को न छूने की हिदायत
मलाणा में देवता जमदग्नि ऋषि का मंदिर है, जिसे यहां देवता जमलू के नाम से भी जाना जाता है । जमदग्नि विष्णु के छठे अवतार परशुराम के पिता थे, मान्यता है कि ऋषि जमलू ध्यानमग्न होने के लिये किसी एकांत स्थान की खोज कर रहे थे । इसी कड़ी में वो मलाणा पहुंचे, जहां आज उन्हें जमलू ऋषि के नाम से पूजा जाता है । यहां पत्थर और लकड़ी से बने मंदिर में ऋषि जमलू की छोटी सी स्वर्ण जड़ित प्रतिमा है ।इस मंदिर में किसी भी चीज को छूने की मनाही है । यहां लगे बोर्ड पर साफ शब्दों में लिखा है कि यहां पर किसी चीज को छूना मना है। इसके दंड के रूप में मलाणावासियों को देवता को बलि समर्पित करनी पड़ती है। यही वजह है कि मलाणावासियों ने मंदिरों और इसके आसपास के स्थानों पर बोर्ड के माध्यम से सैलानियों को किसी भी वस्तु को न छूने की हिदायत दी है। ऐसा न करने पर उक्त शख्स को एक हजार रूपए जुर्माना देना पड़ता है।
पार्वती वैली की गोद में बसे मालणा गांव में यह मान्यता देव स्थान की शुद्धता को बनाए रखने के लिए हैं। यहां जमलू देवता के पुजारी केवल एक ही परिवार से होतें हैं। यह परिवार ही है जिसे यहां पर सफ़ेद रंग की पगड़ी इस गावं में पहनने का हक प्राप्त है।
