भावना शर्मा: आज के दौर में जहां सड़कों पर अंधाधुंध ट्रैफिक हैं। तरह तरह के चार पहिया ओर दो पहिया वाहनों की भरमार हैं ओर उनसे पैदा हो रहा धुंआ जहां पर्यावरण को दूषित कर रहा हैं तो उन वाहनों के पावर हॉर्न से पैदा होने वाली ध्वनि ध्वनि प्रदूषण को बढ़ावा दे रही हैं। वहीं एक समय ऐसा भी था जब सड़कों पर इन वाहनों की भीड़ भाड़ नहीं बल्कि दो पहिया साइकिल ही लोगों की शान की सवारी हुआ करती थी। अपनी साइकिल पर ही लोग घरों से काम पर निकल जाया करते थे और वापिस आया करते थे लेकिन समय की इस दौड़ ओर चकाचौंध में कब यह साइकिल का हैंडल ओर पैडल लग्ज़री ओर ए.सी कंफर्ट गाड़ियों के बीच कहीं पीछे छूट गए पता ही नहीं चला।
अब अगर साइकिल कहीं सड़कों पर देखने के लिए मिलती हैं तो वो उन्हीं लोगों के पास जो अपनी फिटनेस के लिए साइक्लिंग करना पसंद कर करते हैं,लेकिन अगर हमें इस भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को फिट रखना हैं और दूषित होते पर्यावरण को भी बचाना हैं तो आवश्यकता हैं कि एक बार फिर से हम साइकिल को अपनी रोज की सवारी में जरूर शामिल करें ।
साइकिल के अविष्कार की अगर हम बात करें तो बताया जाता है कि साइकिल का आविष्कार है जर्मनी के एक वन अधिकारी karl Von Drais ने 1817 में किया था। उन्होंने साइकिल बिना पैडल के बनाईथी इसे बनाने के लिए लकड़ी का इस्तेमाल किया गया था। इस साइकिल का वजन किलोग्राम के करीब था वहीं इस साइकिल को धक्का लगा कर चलाया जाता था। इसका इस्तेमाल सामान ढोने के लिए किया जाता था। समय के साथ इसका स्वरूप बदला ओर 1863 में फ्रांस के एक मकैनिक Pierre Lallement ने पैडल वाली साइकिल का अविष्कार किया। वहीं अगर बात भारत की कि जाए तो भारत में 1942 में हिन्द साइकिल कंपनी ने साइकिल का अविष्कार किया था।
सेहत के जरूरी हैं 30 मिनट की साइकिल राइड
आज के समय ने जिस तरह लाइफस्टाइल हो गया हैं उसमें यह देखने को मिल रहा है कि युवाओं को भी हार्टअटैक आ रहे है और समय से पहले ही वह इसका शिकार बन रहे हैं । ऐसे में आवश्यक है कि आप रोजाना 30 मिनट की साइकिल राइड को अपने जीवन का हिस्सा बनाए। साइक्लिंग करने से हृदयघात का खतरा कम होता हैं। साइकिल चलाने से फेफड़ों का व्यायाम होता हैं,जिससे उच्च रक्तचाप और दिल के दौरे जैसे रोगों से भी बचाव होगा। इसके साथ ही साइकिल चला कर आप अपना बढ़ा हुआ वजन भी कम कर सकते हो। साइक्लिंग से शरीर में कैलरीज़ बर्न होती हैं जिससे शरीर का मोटापा कम होता हैं।
मानसिक तनाव को दूर करती हैं साइक्लिंग
साइकिल चला कर आप अपने शरीर को स्वस्थ रखने के साथ ही खुद को मानसिक तनाव से भी बचा सकते हैं। साइक्लिंग करते हुए व्यक्ति प्राकृतिक नजारों का भी लुत्फ़ उठा सकता हैं ओर उसे प्राकृति से जुड़ने का अवसर मिलता हैं जिससे मानसिक तनाव दूर करने में मदद मिलती हैं। वहीं साइकिल चलाने से व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती हैं।
जीरो प्रदूषण के साथ पर्यावरण को देगी नया जीवनदान
आरती समय की सबसे बड़ी समस्या शहरों में प्रदूषण की बन गई है शहरों की हवा दूषित हो गई है जिसके पीछे की एक वजह है गाड़ियों से निकलने वाला धुआं। बरेली हवा में लोग सांस ले रहे हैं इससे जहां हमारा पर्यावरण बिगड़ रहा है तो वही लोगों को भी कई तरह की बीमारियां लग रही है ऐसे में है जरूरी हो गया है कि उन लोगों साइकिल की सवारी को प्राथमिकता दें। साइकिल चलाने से जहां आपकी सेहत को लाभ होगा तो वहीं पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होगा। साइकिल से न ही किसी तरह का ध्वनि प्रदूषण और न ही इसमें कोई ईंधन इस्तेमाल होता हैं। इससे किसी तरह का वायु प्रदूषण भी नहीं होता हैं। ऐसे में अगर पर्यावरण को बचाने की दिशा में काम करना है तो साइकिल के इस्तेमाल को लेकर जागरूक होना जरूरी हैं।
