अरविंदर सिंह,हमीरपुर: 5 अक्टूबर को बिलासपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बड़ी रैली आयोजित होने जा रही है। इससे कुछ दिन पहले ही मंडी में भी प्रधानमंत्री मोदी की युवा संकल्प रैली आयोजित करवाई गई थी जिसमें प्रधानमंत्री नहीं पहुंच पाए और उनका दौरा रद्द हो गया था लेकिन अब बिलासपुर में होने वाले रैली के लिए एक बार फिर से भाजपा ने बड़े स्तर पर तैयारियां की है। पीएम की इस रैली को लेकर कांग्रेस पार्टी भाजपा पर हमला बोल रही है। कांग्रेस ने भाजपा पर तंज कसा है कि अगर भाजपा ने काम किया होता तो उन्हें आज पीएम की रैलियों में भीड़ जुटाने की आवश्यकता ना होती।
जिला कांग्रेस कमेटी हमीरपुर जिलाध्यक्ष राजेंद्र जार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश भाजपा सरकार ने पिछले चुनावों में जनता से किए वादे पूरे किए होते और प्रदेश वासियों की आकांक्षाओं पर खरा उतरी होती तो प्रधानमंत्री की रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए उन्हें घर घर जाकर प्रार्थना कर लोगों को आमंत्रित करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के देश के मुखिया जगत प्रकाश नड्डा को हमीरपुर की तरह जगह-जगह सरकार के लाखों रुपए खर्च करवाकर निमंत्रण सभाओं का आयोजन नहीं करना पड़ता।
उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनावों में महज वोटों को बनाने के लिए जगत प्रकाश नड्डा अपने गृह जिला बिलासपुर में 5 अगस्त को आधे अधूरे एम्स का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करवाने जा रहे हैं जो यहां की जनता के साथ सरासर धोखा है। प्रदेश की गरीब जनता को सरकारी बसों की सर्विस से वंचित होने पर उपरोक्त रैलियों के कारण आवागमन में कठिनाई का सामना लगातार उठाना पड़ रहा है।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि महिला सुरक्षा की बड़ी बातें करने वाली भाजपा सरकार शासन काल में आज महिलाएं सबसे असुरक्षित हैं । हिमाचल प्रदेश जैसे शांति प्रिय प्रदेश में ही वर्तमान प्रदेश भाजपा सरकार के कार्यकाल में 5 वर्षों में महिलाओं से बलात्कार व अत्याचार के मामलों में वृद्धि हुई है। वर्ष 2021 में ऐसी 1600 घटनाएं इस प्रदेश में घटित हुई थी जोकि जयराम की भाजपा सरकार के लिए बहुत शर्म की बात है।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाने वाली भाजपा स्वयं प्रदेश में भी और पूरे देश में इस बीमारी से कांग्रेस से कहीं अधिक ज्यादा मात्रा में ग्रसित होने की बात कही । उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने तो अब गांधी परिवार से बाहर के व्यक्ति को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का निर्णय ले लिया है और वह भी संगठनात्मक चुनावों के माध्यम से और भाजपा में तो बोलने की आजादी भी नहीं है । पार्टी चुनाव की बात तो दूर आज देश को तानाशाही तरीके से चलाया जा रहा है जिसका खामियाजा भाजपा को आगामी चुनावों में भुगतना ही पड़ेगा ।
