राहुल चावला, धर्मशाला-:पेंशनरों की लंबित देनदारियों और महंगाई राहत के भुगतान को लेकर हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर सरकार और पेंशनर संगठन आमने-सामने आ गए हैं। पेंशनर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी हिमाचल प्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने धर्मशाला में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रदेश सरकार पर पेंशनरों की मांगों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया।सुरेश ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा विधानसभा में पेंशनरों के बकाया भुगतान को लेकर दिए गए बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि 75 वर्ष से अधिक आयु के सभी पेंशनरों को लंबित राशि का पूरा भुगतान किए जाने की बात जमीनी स्थिति से मेल नहीं खाती। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में पेंशनरों की देनदारियां अभी भी लंबित हैं।उन्होंने बताया कि 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त कर्मचारियों की लीव एनकैशमेंट, ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन और अन्य वित्तीय लाभों का भुगतान पूरी तरह नहीं हो पाया है। ठाकुर के अनुसार, सरकार की ओर से जारी भुगतान संबंधी अधिसूचनाओं में भी पहले कई विसंगतियां सामने आई थीं, जिन्हें संगठन के प्रयासों के बाद संशोधित करवाया गया।
प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि सरकार द्वारा पेंशनरों की देनदारियों को लेकर पेश किए जा रहे आंकड़े वास्तविक स्थिति को स्पष्ट नहीं करते। उन्होंने आरोप लगाया कि बयानबाजी के बजाय सरकार को पेंशनरों के लंबित मामलों का वास्तविक आंकड़ा सार्वजनिक करना चाहिए।ठाकुर ने 15 प्रतिशत महंगाई राहत (DA/DR) के लंबित होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से भुगतान न होने के कारण पेंशनरों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो सितंबर के अंतिम सप्ताह में धरना-प्रदर्शन सहित आंदोलनात्मक कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। उन्होंने सरकार से अपील की कि टकराव के बजाय बातचीत के माध्यम से पेंशनरों की समस्याओं का समाधान किया जाए।
