संजीव महाजन,नूरपूर: मौसम के बदलते मिजाज़ के साथ प्रकृति के विभिन्न रंगों में सराबोर रहने वाला पौंग बांध जलाशय, जिसे महाराणा प्रतामेहमानप सागर के नाम से भी जाना जाता हैं के इर्द-गिर्द सुबह से शाम तक पानी के अंदर और बाहर विदेशी परिंदों की दिल को छू लेने वाली अठखेलियां पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। वहीं इन पक्षियों की मौजूदगी पौंग झील की खूबसूरती को भी चार -चांद लगा रही हैं। इस वर्ष अभी तक पौंग झील में 108 प्रजातियों के 11 लाख 7022 परिंदे यहां पहुंच चुके हैं।
पौंग झील में पहुंचे ज्यादातर पक्षीट्रांस- हिमालयी क्षेत्र के तिब्बत, मध्य एशिया, रूस और साइबेरिया के अपने प्रजनन स्थलों से पलायन करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में, पौंग बांध झील भी एक रामसर स्थल है, जो प्रवासी पक्षियों की कई प्रजातियों के लिए सर्दियों की एक पसंदीदा स्थली बन गया है।
डीएफओ वन्य प्राणी विंग हमीरपुर रेगिनॉल्ड रॉयस्टॉन ने बताया कि 30 तथा 31 जनवरी को वन्य प्राणी विंग, वन विभाग के कर्मियों के साथ-साथ वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, दि बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी सहित राज्य जैव प्रौद्योगिकी बोर्ड ओर पक्षी प्रेमियों के सहयोग से करवाई गई गणना के अनुसार इस वर्ष 108 प्रजातियों के एक लाख सत्रह हज़ार बाईस मेहमान परिंदों ने अब तक दस्तक दी हैं। आने वाले दिनों में पक्षियों की आबादी और प्रजातियों की संख्या उनके प्रजनन स्थलों में वापसी के दौरान बढ़ने की उम्मीद हैं, क्योंकि अब उत्तर- पश्चिम मध्य और दक्षिण भारत से पक्षियों का पौंग झील में आगमन शुरू हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि पौंग झील में आने वाले परिंदों की हर वर्ष गणना की जाती हैं, लेकिन यह प्रसन्नता का विषय है कि पिछले वर्ष 110309 पक्षियों की तुलना में इस वर्ष 6713 की वृद्धि दर्ज की गई है। इस वर्ष सबसे अधिक वृद्धि उत्तरी पिंटेल की दर्ज की गई है जो पिछले वर्ष के 4665 के आंकड़े से बढ़कर इस वर्ष 15784 हो गई है। इसके अतिरिक्त बार हेडेड गीज़ की गणना में भी वृद्धि दर्ज हुई है जो पिछले वर्ष की संख्या से 2665 अधिक है।
हिमाचल प्रदेश में पहली बार मिली एक नई प्रजाति की लंबी पूंछ वाली बत्तख
डीएफओ ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष पहली बार सुगनाड़ा क्षेत्र में बोटिंग पॉइंट के पास लंबी पूंछ वाली बतख पाई गई हैं। यह बतख अधिकतर अमेरिकन महाद्वीप में पाई जाती हैं। इससे पहले भारत में कश्मीर घाटी में ही इस प्रजाति की एक बतख पाई गई हैं। इस वर्ष अन्य प्रमुख प्रजातियों में यूरेशियन कूट (13035), उत्तरी पिंटेल (15784), कॉमन टील (6478) हैं। कॉमन पोचर्ड (8096), यूरेशियन कबूतर (1674), लिटिल कॉर्मोरेंट (6565), नॉर्दर्न शोवेलर (1518) और ग्रेट कॉर्मोरेंट (2768) झील में रिपोर्ट की गई जबकि अन्य असामान्य प्रजातियों में लेसर व्हाइट, फ्रंटेड गूज, रेड क्रेस्टेड पोचर्ड, फेरुगिनस पोचर्ड, पाइड एवोकेट, नॉर्दर्न लैपविंग, कॉमन केस्ट्रेल आदि पाई गई। मतगणना अभ्यास के दौरान एक रिंग्ड बार- हेडेड गूज भी देखा गया।
पर्यटन की दृष्टि से पौंग झील को विकसित करने को लेकर होगा काम
कृषि मंत्री चंद्र कुमार का कहना हैं कि पौंग झील में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं ओर इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित कर विश्व के पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए हर संभव प्रयास किए जायेंगे, जिससे स्थानीय लोगों विशेषकर बेरोजगार युवाओं को रोज़गार व स्वरोजगार के बेहतर अवसर सुनिश्चित हो सकें।
इको टूरिज्म ओर रोजगारउन्मुखी गतिविधियों को विकसित करने पर दिया जाएगा जोर
उपायुक्त डॉ. निपुण जिंदल ने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सूक्खु के दिशानिर्देशानुसार इस क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए इको टूरिज्म सहित अन्य रोजगारोन्मुखी गतिविधियों को विकसित करने की संभावनाओं पर विशेष कार्य किया जाएगा।
