भावना शर्मा: वर्ल्ड हेरिटेज ट्रैक कालका शिमला का सफर वैसे तो अपने आप में ही रोमांचकारी सफर हैं, लेकिन अगर आप इस ट्रैक पर 117 साल पुराने स्टीम इंजन में सफर करते हैं तो यह सफर और भी सुहावना हो जाता हैं। यह स्टीम इंजन आपको उसी ब्रिटिश इरा में ले जाता है जिस समय ट्रैक पर डीजल इंजन नहीं बल्कि स्टीम इंजन वाली गाड़ियां ही चला करती थी। यह स्टीम इंजन आज भी इस ऐतिहासिक ट्रैक की शान और धरोहर हैं जिसे रेलवे ने सहेज कर रखा हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं 520 KC नामक स्टीम इंजन की जो आज भी कालका शिमला रेल ट्रैक पर दौड़ रहा हैं।
विदेशी पर्यटक का आज भी ऐसे इंजन में सफर करने के लिए लाखों का किराया देते हैं। अब इस स्टीम इंजन को कालका शिमला रेल ट्रैक पर स्पेशल बुकिंग के बाद ही चलाया जाता हैं। जब कभी विदेशी पर्यटक इस इंजन में सफर की इच्छा जाहिर करते हैं तो रेलवे की ओर से पर्यटकों के लिए तय किराए पर इस स्टीम इंजन में कोच जोड़कर इसे ट्रैक पर उतार कर शिमला रेलवे स्टेशन से कैथलीघाट तक चालया जाता हैं। इस स्टीम लोकोमोटिव इंजन में सफर का रोमांच आज भी वैसा ही बना हुआ है जैसा ब्रिटिश कालीन समय में हुआ करता था। आज भी जब यहां स्टीम लोकोमोटिव इंजन ट्रैक पर चलता है तो स्थानीय लोग इसे देखने के लिए ट्रैक के आसपास पहुंच जाते हैं।
यह हैं KC 520 लोकोमोटिव स्टीम इंजन का इतिहास
कालका-शिमला ट्रैक पर लोकोमोटिव KC 520 स्टीम इंजन 1906 में अंग्रेजों ने चलाया था। 520 केसी नामक यह भाप इंजन नार्थ ब्रिटिश लोकोमोटिव कंपनी, इंग्लैंड की कंपनी ने बनाया था। 1971 तक भाप इंजन ट्रैक पर दौड़ता रहा जब तक डीज़ल इंजन ट्रैक पर नहीं चले । इसके बाद जब डीज़ल इंजन ट्रैक पर चलना शुरू हुए तो इस स्टीम इंजन को 1971 में सर्विस करने के बाद ट्रैक पर चलाना बंद कर दिया गया। 2001 में भाप इंजन की मरम्मत करवाई गई जिसके बाद बूकिंग पर इस स्टीम इंजन को ट्रैक पर दोबारा से चलाना शुरू किया गया। यह इंजन शिमला में खड़ा रहता है और इसे पर्यटकों की ओर से बुक किए जाने पर ही चलाया जाता हैं।
स्टीम इंजन की यह है खास बात
शिमला रेलवे की धरोहर माने जाने वाले स्टीम इंजन की खास बात यह है कि इसकी छुक-छुक की आवाज सिर्फ स्टीम इंजन से पैदा होती हैं। स्टीम इंजन में भाप के पिस्टन में आगे पीछे चलने और बाहर निकलने से छुक-छुक की आवाज पैदा होती हैं। स्टीम इंजन में बजने वाली सीटी भाप के दबाव से ही बजती हैं। डीजल इंजन के मुकाबले स्टीम इंजन की सीटी ज्यादा तीखी और दूर तक सुनाई देने वाली होती हैं। इंजन में लाइट भी स्टीम से ही जलती हैं।
डेढ़ लाख के किराए पर चलता है स्टीम इंजन
कालका शिमला ट्रैक की इस ऐतिहासिक धरोहर स्टीम इंजन को ट्रैक पर चलाने के लिए रेलवे की ओर से डेढ़ लाख किराया लिया जाता हैं। उसके बाद इस इंजन में कोच लगाकर इसे शिमला से कैथलीघाट तक चलाया जाता हैं।
इंजन चलाने के लिए तीन कर्मचारियों की कि गई हैं तैनाती
स्टीम इंजन चलाने के लिए तीन कर्मचारियों की तैनाती की गई है। ड्राइवर इंजन स्टार्ट करेगा, फर्स्ट फायर मैन स्टीम तैयार करेगा और सेकेंड फायरमैन केबिन तक कोयला पहुंचाएगा। शिमला से कैथलीघाट आवाजाही के लिए स्टीम इंजन में लगभग साढ़े तीन टन कोयले और 56 सौ लीटर पानी की खपत होती हैं।
