राहुल चावला,धर्मशाला: रीजनल फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री नॉर्थ रेंज धर्मशाला में इन दिनों देश के अलग-अलग राज्यों से आए हुए छात्र फॉरेंसिक साइंस से जुड़ी हुई बारीकियां सीख रहे हैं। यहां छात्रों को फॉरेंसिक साइंस से जुड़ा हुआ प्रैक्टिकल ज्ञान दिया जा रहा है जिससे कि छात्र इस फील्ड में बेहतर कार्य कर सकें। बेंगलुरु, पंजाब, चंडीगढ़, इंदौर व शिमला स्थित विश्वविद्यालयों के 25 विद्यार्थी जोकि बीएससी, एमएससी फॉरेंसिक साइंस में कर रहे हैं, उनका दल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के लिए रीजनल फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री नॉर्थ रेंज धर्मशाला पहुंचा हैं।
आज के दौर में जिस तरह से लगातार क्राइम रेट बढ़ रहा है, ऐसे में फॉरेंसिक साइंस के स्टूडेंट्स को प्रैक्टिकल के माध्यम से फॉरेंसिक साइंस की विभिन्न विधाओं की जानकारी यहां दी जा रही हैं।
आरएफएसएल के सहायक निदेशक डॉ. राकेश सोनी ने बताया कि किसी भी क्राईम सीन पर पूरी जांच करने के बाद लैबोरेट्री में किस तरह से रिपोर्ट तैयार की जाती है और कैसे इसे जारी किया जाता हैं, इसकी जानकारी छात्रों को दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि 25 छात्र एक महीने के प्रशिक्षण के लिए आए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक के पांच विभागों के साथ जोड़ा गया हैं। यहां उन्हें संबंधित विभाग के विशेषज्ञों की ओर से ट्रेनिंग दी जा रही हैं। सभी छात्रों का बैच बनाकर बायोलॉजी, कैमिस्ट्री, डीएनए, साइबर में एक-एक सप्ताह की ट्रेनिंग दी जाएगी।
डॉ. राकेश सोनी ने कहा कि कई बच्चे सीरियल देखकर फॉरेंसिक साइंस विषय चुन लेते हैं, जबकि थ्योरी व प्रैक्टिकल में काफी अंतर होता हैं। विशेषज्ञों की देखरेख में फॉरेंसिक साइंस के छात्र प्रैक्टिकल करते हैं तो अच्छा स्किल सामने आता हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की जरूरत पड़ेगी।ऐसे में इन छात्रों के लिए यह प्रैक्टिकल ट्रेनिंग काफी लाभप्रद रहेगी।
