गुलशन धनोआ,देहरा(TSN): हिमाचल प्रदेश में अलग-अलग जिलों में अपनी मांगों को लेकर जिला परिषद कैडर कर्मचारी महासंघ के 4700 सदस्य एक बार फिर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं। वहीं इस कलम छोड़ हड़ताल के समर्थन में विभिन्न पंचायतों के प्रधान उपप्रधान सहित पंचायत के 150 प्रतिनिधियों ने भी जिला परिषद कैडर कर्मचारियों का समर्थन किया हैं। पंचायत प्रतिनिधियों ने भी हिमाचल प्रदेश सरकार को दो टूक शब्दों में कहा है कि अगर इनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो सभी प्रधान, उपप्रधान, पंचायत प्रतिनिधियों ने सड़कों पर उतरने का फैसला लिया हैं।
विकासखंड देहरा के तहत भी जिला परिषद कैडर के अधिकारी और कर्मचारी अनिश्चित काल के लिए कलम छोड़ हड़ताल पर चले गए हैं। ऐसे में विकासखंड के तहत पड़ने वाली 79 पंचायतों में जरूरी कामकाज ठप पड़ गया हैं। विकासखंड देहरा कि 79 पंचायतों के 50 सचिव, 21 टीए, 3 जेई भी हड़ताल पर बैठे हैं। विधानसभा क्षेत्र देहरा और ज्वालामुखी की पंचायतों में काम ठप हो गया हैं। लोगों के डिजास्टर के तहत होने वाले काम, मनरेगा सहित अन्य जरूरी कार्य प्रभावित हो गए हैं। वहीं, जिला परिषद कैडर के अधिकारी एवं कर्मचारी विकासखंड देहरा ने मांगे पूरी न होने तक हड़ताल को जारी रखने का अल्टीमेटम जारी कर दिया हैं, ऐसे में आने वाले दिनों में ग्रामीणों की मुश्किलें और भी बढ़ सकती है।
देहरा में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे जिला परिषद कैडर अधिकारी व कर्मचारी महासंघ देहरा ब्लॉक के अध्यक्ष संदीप गुलेरिया ने बताया कि विकासखंड देहरा 79 पंचायतों के 50 सचिव, 21 टीए, 3 जेई सहित हिमाचल प्रदेश में जिला परिषद कैडर के 4700 कर्मचारी और अधिकारी काम कर रहे हैं। 22 सालों से वह लगातार काम कर रहे हैं और इतने लंबे अंतराल के बाद भी उन्हें पंचायती राज विभाग में विलय नहीं किया गया हैं।
ग्राम पंचायत अधवानी की प्रधान अनिता कुमारी, ग्राम पंचायत हिरण के उपप्रधान हरि सिंह और ग्राम पंचायत लगडू की प्रधान लता कुमारी ने कहा कि विकास खंड देहरा कि 79 पंचायतों के प्रधान उपप्रधान व पंचायत प्रतिनिधि लगभग 150 लोग जिला परिषद कैडर कर्मचारियों के हक में आज हड़ताल का समर्थन करने आए हैं। उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार जल्द ही इन कर्मचारियों का पंचायती राज विभाग में विलय करे। ताकि इनको भी इनके अधिकार मिल सके। वहीं इन्होंने कहा कि हड़ताल की वजह से सभी विकास कार्य ठप पड़ गए हैं और सीमेंट भी खराब हो रहा हैं। सिलाई अध्यापिकाओं और चौकीदारों से अब पंचायतों के काम करवाए जाएंगे जिसका हम विरोध करेंगे। अगर जिला परिषद कैडर कर्मचारियों की मांगों को नहीं माना गया तो सभी पंचायतों के प्रतिनिधि सड़कों पर उतर कर प्रदेश सरकार का विरोध करेंगे।
बता दें, जिला परिषद कैडर महासंघ की मुख्य मांग अधिकारियों और कर्मचारियों का ग्रामीण विकास विभाग या फिर पंचायतीराज विभाग में विलय करने की हैं,ताकि इन विभागों में कार्यरत कर्मचारियों की तरह उन्हें भी सभी तरह के लाभ मिल सके। इसके अतिरिक्त जिला परिषद कैडर के अधिकारी और कर्मचारी अन्य विभागों को मिलने वाले छठे वेतन आयोग के लाभ दिए जाने की मांग कर रहे हैं। नए सचिवों को छठे वेतन आयोग का लाभ मिल रहा हैं, जबकि पुराने सचिवों को इससे वंचित रखा गया हैं। इसके लिए जिला परिषद कैडर के अधिकारी और कर्मचारी मांग पूरा न होने पर पूर्व भाजपा की सरकार में भी जुलाई 2022 में हड़ताल पर बैठे थे। ऐसे में 11 दिनों तक पंचायतों में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया था। अब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से पिछले 9 महीनों से यह मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक हमारी मांगों को सुना नहीं गया। इसके चलते सभी ने कलम छोड़ हड़ताल पर बैठने का फैसला लिया हैं।
