राहुल चावला , धर्मशाला(TSN): प्रदेश में साक्षरता दर 88 फ़ीसदी है जो कि प्रदेश के गठन के दौरान महज़ 47 फ़ीसदी तक ही थी तो इसे बढ़ाने में प्रदेश में आज दिन तक जो भी सरकारें रहीं उनका अमूल्य योगदान रहा हैं। बावजूद इसके आज भी शिक्षा के स्तर को बढाने उसमें गुणवत्ता लाने की सख्त जरूरत हैं। यह बात शुक्रवार को कांगड़ा के जिला मुख्यालय धर्मशाला पहुंचने पर शिक्षा मंत्री ने प्रदेश की शिक्षा के आधारभूत ढांचे पर अपनी प्रतिक्रिया ज़ाहिर करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में चाहे उच्च शिक्षा की बात हो या माध्यमिक शिक्षा संस्थानों की दोनों में व्यवस्था को सुदृढ़ करना आज की पहली प्राथमिकता हैं। उन्होंने कहा कि बीते 6 सालों में उच्च शैक्षणिक संस्थानों के 134 कॉलेजों में से 105 कॉलेजों में जो प्रधानाचार्यों के पद खाली पड़े थे डीपीसी नहीं हो पाई थी हमने आते ही 80 जगहों पर डीपीसी के माध्यम से प्रिंसिपल्स को प्रमोशन देकर नियुक्त किया हैं। ठीक ऐसे ही इन कॉलेजों में एक हजार से 12 सौ के करीब प्रोफ़ेसर के पद भी रिक्त चले थे हमने वहां भी नियुक्तियां शुरू की हैं। इतना ही नहीं 4 सौ कॉलेजों में तो प्रध्यापक नियुक्त भी हो चुके हैं और डेढ़ सौ की नियुक्ति का प्रोसेस जारी हैं।
रोहित ठाकुर ने कहा कि करीब 585 पीजीटी के पदों को भरने की अपील हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग को चली गई हैं जो कि 10 से 15 दिनों के अंदर विज्ञापन के जरिए सार्वजनिक की जाएंगी। बहुत जल्द वहां भी भर्ती का प्रोसेस शुरू हो जाएगा, हालांकि इनमें से कुछ प्रमोशन से भी भरी जाएंगी। ऐसे में हज़ार 12 सौ पोस्टें जैसे ही भरेंगी तो प्रदेश के दुर्गम इलाकों में भी शैक्षणिक व्यवस्था मजबूत होगी और शिक्षा की गुणवत्ता में भी इज़ाफ़ा होगा।
उन्होंने कहा कि इसी तर्ज पर एलिमेंट्री शैक्षणिक संस्थानों में भी 53 सौ पदों जिसमें चाहे जेबीटी हो या टीजीटी और सी एंड वी पद हर एक की भर्ती के लिये कैबिनेट से मंजूरी ली है जिसके लिए वो कैबिनेट और मुख्यमंत्री के आभारी हैं। उन्होंने कहा कि इसकी भर्ती प्रक्रिया भी बहुत जल्द शुरू होने वाली हैं। इसके लिए जहां बैचबाइज़ 2521 पोस्टों की भर्ती को विज्ञापित किया जा चुका हैं, वहीं जैसे ही नया चयन आयोग गठित होगा तुरंत 3 साढ़े तीन हज़ार पोस्टें भरी जाएंगी।
रोहित ठाकुर ने बताया कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि मौजूदा सरकार को भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़झाला होने के चलते हमीरपुर कर्मचारी चयन आयोग को भंग करना पड़ा है जिसके चलते भर्ती प्रोसेस बहुत लंबा खींच गया हैं। मगर नवंबर माह में ये नए सिरे से डिजिटल और पारदर्शी तरीके से दोबारा काम करना शुरू कर देगा। नतीजतन प्रदेश के सैकड़ों युवाओं को जहां रोजगार मिलेगा, वहीं शिक्षा विभाग भी अधर में लटकी भर्तियों को मुक़म्मल करेगा। .
