अनिल कुमार, किन्नौर: अगर आप हिमाचल के किन्नौर में जा कर ट्रैकिंग करने का प्लान बना रहे है तो रुक जाइए। यह खबर आपको पढ़ना जरूरी है। किन्नौर प्रशासन की ओर से किन्नौर में हर तरह ट्रैकिंग पर रोक लगा दी गई है। यहां तक की प्रशासन ने
उत्तराकाशी के डीएम को एक चिट्ठी लिखी है जिसमें डीसी किन्नौर ने डीएम उत्तराकाशी को उत्तराखंड की तरफ जीतने भी ट्रैकिंग स्थल है उन सभी इलाकों से किन्नौर जिला की ओर ट्रैकिंग को रोकने के लिए कहा गया है। वहीं किन्नौर की तरफ से डीसी ने हर ट्रैकिंग क्षेत्रों पर ट्रेकिंग के लिए फिलहाल प्रतिबंध लगाया है।
उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र से किन्नौर की ओर बहुत सारे ट्रैकिंग स्थल है। उत्तराखंड से बरासु पास,लामखागा, खिमल्याट पास यह सभी उत्तराखंड से किन्नौर के ट्रैकिंग क्षेत्र है जहां पर सबसे अधिक ट्रैकर लापता होने के साथ ही उनकी मृत्यु भी हुई है। सांगला से रोहड़ू व उत्तराखंड दोनों ट्रैक जुड़े है वह रुपिन पास,बुरांग पास है जहां पर भी हर वर्ष ट्रैकर लापता होते है। ऐसे में रेस्क्यू टीम की मशक्क्त के बाद ट्रैकरों को खोजा गया है।
इन सभी ट्रैकिंग इलाकों को बंद करने के पीछे प्रशासन का उद्देश्य लोगों के जानमाल को नुकसान होने से रोकना है। किन्नौर प्रशासन की तरफ से किन्नौर जिला से उत्तराखंड के लिए ट्रैकिंग के लिए लंबे समय से ट्रैकिंग पर रोक लगाई गई है लेकिन उत्तराखंड प्रशासन की तरफ से किन्नौर की तरफ ट्रैकिंग दलों को भेजा जा रहा है। ट्रैकर को ट्रैकिंग करने के लिए उत्तराखंड प्रशासन की तरफ से ट्रैकरों की शारीरिक जांच, ट्रैकिंग दल को ले जाने वाले एजेंसी की जिम्मे रखी गई है जिसके मद्देनजर जिस क्षेत्र में ट्रैकर पहुंचेंगे उस क्षेत्र के प्रशासन को भी तलब किया जाता है, लेकिन अब तक जितने भी हादसे हुए वह उत्तराखंड की तरफ से ट्रैकर किन्नौर की ओर आते हुए पहाड़ों पर गिरने या लापता होने की वजह से हुए है। ऐसे में प्रशासन ने पूर्ण रूप से अब ट्रैकिंग को बंद किया है।
डीसी किन्नौर आबिद हुसैन सादिक ने बताया कि किन्नौर जिला व उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों मे बढ़ते हुए ट्रैकिंग के हादसों को देखते हुए अब किन्नौर की तरफ से ट्रैकिंग पॉइंट को बंद किया गया है। पुलिस प्रशासन की भी कड़ी निगरानी सभी ट्रैकिंग क्षेत्रों मे रहेगी। यदि कोई गुपचुप तरीके से ट्रैकिंग करेगा तो उक्त ट्रैकर या कोई भी ट्रैकिंग संस्था हो उनपर सख्त कार्रवाई अमल मे लाई जाएगी। उन्होंने बताया कि अबतक उत्तराखंड व किन्नौर के सीमांत क्षेत्रों में ट्रैकिंग के दौरान 10 ट्रैकरों की मौत हुई है। वहीं 12 लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए है तो वहीं दो लोग आज तक इस ट्रैक लापता हैं। वहीं इस वर्ष भी खिमलोगा दर्रा में 4 सितंबर को एक ट्रैकर की मौत हुई है।
डीसी किन्नौर आबिद हुसैन सादिक़ ने बताया कि गत दिनों भी उत्तराखंड कि उत्तरकाशी से 28 अगस्त को 3 ट्रैकर और 5 पोर्टर हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के छितकुल लिए रवाना हुए। इनमें से एक ट्रैकर 50 वर्षीय नरोत्तम राम और 3 पोर्टर गत दिनों छितकुल पहुंचे। इनमें से एक ट्रेकर 50 वर्षीय नरोत्तम राम व 3 पोर्टर गत दिनों छितकुल पहुंचे। ट्रैकरों व पोर्टरो ने बताया कि उनके साथ आ रहे एक ट्रैकर सुजॉय डुले की खिमलोगा दर्रे को पार करते हाथ से रस्सी छूटने के चलते मौके पर ही मौत हो गई है,जबकि दूसरा ट्रैकर 49 वर्षीय सुब्रोतो विश्वास इस दौरान घायल हो गया है। उन्होंने बताया कि घायल ट्रैकर व तीन पोर्टर अभी भी खिमलोगा दर्रे में फंसे है। ऐसे मे रेस्क्यू टीम ने इन सभी ट्रैकरों व पोर्टरो को आज सुरक्षित छितकुल तक पहुंचाने क़ा काम किया है लेकिन एक ट्रैकर जिसकी मृत्यु हुई है उसका शव अभी भी वापिस नहीं लाया गया है जिसके लिए आईटीबीपी के जवान अभी ही रेस्यू कर रहे है।
बता दे कि मौत के इस ट्रैक या सफर में ट्रैकरों की मौत व लापता होने का इलाका कहा जा रहा है। ऐसे में अब प्रशासन की ओर से किन्नौर जिला के सभी ट्रैकिंग स्थलों के बॉर्डर इलाकों के ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस, होमगार्ड के जवान तैनात कर दिए है ताकि कोई गुपचुप तरीके से ट्रैकिंग न कर सके।
